उच्च प्राथमिक स्तर पर बच्चों के भाषा-विकास के लिए जरूरी है कि ________ समृद्धि…
2019
उच्च प्राथमिक स्तर पर बच्चों के भाषा-विकास के लिए जरूरी है कि ________ समृद्धि का भाषा, ________ व अन्य विषयगत शिक्षण युक्ति में उपयोग किया जाए।
- A.
साहित्य, कला
- B.
कलात्मक, साहित्य
- C.
भाषिक, साहित्य
- D.
परिवेश, भाषिक
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Correct answer: C
अवधारणा: राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) के अनुसार बच्चों के भाषा-विकास हेतु "भाषिक समृद्धि" (linguistic enrichment) की अवधारणा केंद्रीय है — अर्थात बच्चों को विविध भाषिक सामग्री तथा साहित्य (कहानी, कविता आदि) से यथासंभव अधिक अनुभव मिलना चाहिए, और यह अनुभव केवल भाषा की कक्षा तक सीमित न रहकर अन्य सभी विषयों के शिक्षण में भी शामिल होना चाहिए (भाषा-पार पाठ्यक्रम दृष्टिकोण)। इससे बच्चे की शब्द-संपदा, अभिव्यक्ति-क्षमता व कल्पनाशीलता का विकास होता है।
प्रयोग: प्रश्न में दो रिक्त स्थान हैं — पहला "समृद्धि" से पहले, दूसरा "अन्य विषयगत शिक्षण युक्ति" से पहले। "भाषिक समृद्धि" मानक पारिभाषिक शब्द है जो भाषा-संबंधी संवर्धन को दर्शाता है, और "साहित्य" वह प्रमुख साधन है जिसके द्वारा यह समृद्धि लाई जाती है। इस प्रकार वाक्य बनता है: "भाषिक समृद्धि का भाषा, साहित्य व अन्य विषयगत शिक्षण युक्ति में उपयोग किया जाए" — अर्थात भाषा व साहित्य दोनों को अन्य विषयों के शिक्षण में भी उपयोग करके भाषिक समृद्धि लाई जाए।
"साहित्य, कला": यहाँ पहला शब्द सीधे "साहित्य" रखा गया है, जिससे "साहित्य समृद्धि" बनता है — यह शब्द-युग्म भाषा-विकास दस्तावेज़ों की प्रचलित शब्दावली में नहीं मिलता, इसलिए यह वाक्यांश स्वाभाविक नहीं लगता।
"कलात्मक, साहित्य": पहला शब्द "कलात्मक" रखने से "कलात्मक समृद्धि" (कला-संबंधी संवर्धन) बनता है, जो वाक्य में स्पष्ट रूप से उल्लिखित "बच्चों के भाषा-विकास" के उद्देश्य से मेल नहीं खाता — क्योंकि यह विकल्प संवर्धन का ध्यान भाषा से हटाकर कला की ओर मोड़ देता है।
"परिवेश, भाषिक": पहला शब्द "परिवेश" रखने से "परिवेश समृद्धि" बनता है, जो बालक के आस-पास के वातावरण पर केंद्रित है, न कि वाक्य में उल्लिखित विशिष्ट विकासात्मक फोकस पर; साथ ही यहाँ शब्दों का क्रम भी वाक्य की अपेक्षित संरचना से मेल नहीं खाता, जिससे यह युग्म एक सुसंगत वाक्य नहीं बनाता।
निष्कर्ष: दिए गए विकल्पों में से केवल "भाषिक, साहित्य" वाला युग्म ही "भाषिक समृद्धि" के मानक पद तथा साहित्य के प्रमुख साधन के रूप में उपयोग की संगति बैठाता है, अतः यही सही उत्तर है।