भाषा सीखने और भाषा अर्जित करने में मुख्य अंतर का आधार नहीं है –
2019
भाषा सीखने और भाषा अर्जित करने में मुख्य अंतर का आधार नहीं है –
Answer: D. व्याकरण — भाषा-अर्जन बालक द्वारा एक स्वाभाविक, सामाजिक परिवेश में, अनौपचारिक रूप से और अवचेतन स्तर पर भाषा ग्रहण करने की प्रक्रिया है, जैसे मातृभाषा का स्वाभाविक विकास…
- A.
भाषाई परिवेश
- B.
स्वाभाविकता
- C.
सहजता
- D.
व्याकरण
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Correct answer: D
भाषा-अर्जन बालक द्वारा एक स्वाभाविक, सामाजिक परिवेश में, अनौपचारिक रूप से और अवचेतन स्तर पर भाषा ग्रहण करने की प्रक्रिया है, जैसे मातृभाषा का स्वाभाविक विकास होता है, जबकि भाषा-सीखना एक सचेत और औपचारिक प्रक्रिया है जिसमें कक्षा में स्पष्ट नियमों तथा संरचना पर ध्यान देकर भाषा सिखाई जाती है। शिक्षाशास्त्र में इन दोनों प्रक्रियाओं के बीच का मुख्य अंतर सामान्यतः प्रक्रिया के तीन आधारों पर किया जाता है — यह किस परिवेश में घटित होती है, यह कितनी स्वाभाविक अर्थात अचेतन है, और यह कितनी सहज अर्थात अनायास है।
प्रश्न में दिए गए विकल्पों को इसी ढाँचे पर परखने पर भाषाई परिवेश, स्वाभाविकता और सहजता — तीनों ही उस प्रक्रिया का वर्णन करते हैं जिसके सहारे भाषा ग्रहण होती है, इसलिए ये तीनों भाषा-अर्जन और भाषा-सीखने के बीच के वास्तविक विभेदक आधार हैं।
भाषाई परिवेश — भाषा-अर्जन स्वाभाविक, सामाजिक परिवेश में होता है, जबकि भाषा-सीखना औपचारिक अथवा कक्षाई परिवेश में होता है; अतः यह एक वास्तविक विभेदक आधार है, अपवाद नहीं।
स्वाभाविकता — भाषा-अर्जन अचेतन रूप से स्वतः घटित होता है, जबकि भाषा-सीखना सचेत प्रयास से होता है; यह भी एक वास्तविक विभेदक आधार है।
सहजता — भाषा-अर्जन सहज और अनायास होता है, जबकि भाषा-सीखने में अभ्यास और श्रम आवश्यक होता है; यह भी एक वास्तविक विभेदक आधार है।
इसके विपरीत व्याकरण दोनों प्रक्रियाओं की अंतिम भाषिक दक्षता का एक अंश अर्थात विषय-वस्तु मात्र है, न कि वह प्रक्रिया-लक्षण जिस पर भाषा-अर्जन और भाषा-सीखने के बीच का मुख्य अंतर टिका होता है — इसलिए दिए गए विकल्पों में यही एक विकल्प इस अंतर का आधार नहीं बनता। CTET जुलाई 2019, पेपर-2 की आधिकारिक उत्तर-कुंजी में भी इसी विकल्प की पुष्टि इस प्रश्न के सही उत्तर के रूप में की गई है।