शिक्षण की वह विधि जिसमें अध्यापक और चार विद्यार्थी विभिन्न भूमिकाओं के साथ एक…

2024

शिक्षण की वह विधि जिसमें अध्यापक और चार विद्यार्थी विभिन्न भूमिकाओं के साथ एक सहयोगात्मक अधिगम समूह का गठन करते हैं। पाठ्यवस्तु की विषयवस्तु पर संवाद किया जाता है, जिससे समीपस्थ विकास का क्षेत्र सृजित होता है और परिणामस्वरूप पठन बोध में सुधार होता है। इस विधि को क्या कहेंगे?

  1. A.

    व्याकरण अनुवाद विधि

  2. B.

    पारस्परिक शिक्षण

  3. C.

    संरचनात्मक उपागम

  4. D.

    मॉडल पठन

Show answer & explanation

Correct answer: B

जब एक अध्यापक और विद्यार्थियों का एक छोटा समूह (सामान्यतः चार सदस्य) पाठ्यवस्तु पर भविष्यवाणी करना, प्रश्न-निर्माण, स्पष्टीकरण और सारांश — इन चार भूमिकाओं का बारी-बारी से नेतृत्व करते हुए सहयोगात्मक संवाद करते हैं, और यह प्रक्रिया वाइगोत्स्की के समीपस्थ विकास के क्षेत्र (Zone of Proximal Development) के सिद्धांत के अनुसार विद्यार्थियों को व्यक्तिगत क्षमता से आगे की समझ तक पहुँचाकर पठन बोध में सुधार लाती है, तो इस सहयोगात्मक पठन-बोध रणनीति को 'पारस्परिक शिक्षण' (Reciprocal Teaching) कहा जाता है — जिसे पालिन्सर व ब्राउन (Palincsar & Brown) ने प्रतिपादित किया था।

अब इस परिभाषा को प्रश्न के विवरण पर लागू करते हैं:

  1. प्रश्न में अध्यापक और चार विद्यार्थी मिलकर एक सहयोगात्मक अधिगम समूह बनाते हैं — यह पारस्परिक शिक्षण की विशिष्ट समूह-संरचना से मेल खाता है।

  2. समूह के सदस्य 'विभिन्न भूमिकाओं' के साथ भाग लेते हैं — यह भविष्यवाणी, प्रश्न-निर्माण, स्पष्टीकरण व सारांश की चार रणनीतियों की भूमिका-आधारित बारी-बारी संरचना को इंगित करता है।

  3. पाठ्यवस्तु पर संवाद से समीपस्थ विकास का क्षेत्र सृजित होता है, क्योंकि अधिक सक्षम साथी/अध्यापक के मार्गदर्शन में विद्यार्थी वह समझ प्राप्त करते हैं जो अकेले संभव नहीं थी — यह वाइगोत्स्की के सिद्धांत का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग है।

  4. परिणामस्वरूप पठन बोध में सुधार होता है, जो इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य एवं परिणाम है।

  5. अतः प्रश्न में वर्णित समस्त विशेषताएँ पारस्परिक शिक्षण की परिभाषा से पूर्णतः मेल खाती हैं।

अन्य विकल्पों से तुलना:

  • व्याकरण अनुवाद विधि — भाषा-अनुवाद और औपचारिक व्याकरण नियमों पर केंद्रित है; इसमें भूमिका-आधारित समूह-संवाद या समीपस्थ विकास क्षेत्र की कोई अवधारणा शामिल नहीं है।

  • संरचनात्मक उपागम — वाक्य-प्रतिरूपों के क्रमबद्ध अभ्यास पर बल देता है; इसमें समूह में बारी-बारी भूमिका निभाने या सहयोगात्मक संवाद की कोई प्रक्रिया नहीं है।

  • मॉडल पठन — केवल शिक्षक द्वारा प्रवाही पठन का एकतरफा प्रदर्शन है; इसमें विद्यार्थियों की सक्रिय, बारी-बारी भूमिका या समूह-संवाद शामिल नहीं है।

अतः वर्णित शिक्षण-विधि 'पारस्परिक शिक्षण' है।

Explore the full course: Uptet Paper 2

Loading lesson…