कक्षा सात की अध्यापिका जोड़ियों (Pairs) में कार्य करवाने वाली गतिविधि करवा रही…
2024
कक्षा सात की अध्यापिका जोड़ियों (Pairs) में कार्य करवाने वाली गतिविधि करवा रही हैं जिसमें सभी जोड़ियों (Pairs) को दस वाक्यों की कहानी पर काम करने के लिए देती है। पहली जोड़ीदार पहला वाक्य पढ़ती है और दूसरी जोड़ीदार उस वाक्य को लिखती है। अब दूसरी जोड़ीदार दूसरा वाक्य पढ़ती है और पहली जोड़ीदार उस दूसरे वाक्य को लिखती है। इस तरह से दोनों जोड़ीदार कहानी पूरी करते हैं। बाद में वे मूल कहानी से अपने लिखे हुए की तुलना करते हैं। इस गतिविधि को क्या कहेंगे?
- A.
पारस्परिक लेखन
- B.
पारस्परिक श्रवण
- C.
वाक्य श्रुतलेख
- D.
पारस्परिक श्रुतलेख
Show answer & explanation
Correct answer: D
श्रुतलेख-आधारित भाषा-शिक्षण गतिविधियों का वर्गीकरण आदान-प्रदान की दिशा के आधार पर किया जाता है। सामान्य वाक्य श्रुतलेख एकदिशीय होता है: प्रायः शिक्षक के रूप में एक ही वाचक बोलकर श्रुतलेख देता है, जबकि श्रोता केवल लिखते हैं। पारस्परिक श्रुतलेख सहपाठी-आधारित और द्विदिशीय होता है: दोनों साथी बारी-बारी से पढ़ने/श्रुतलेख देने तथा सुनने/लिखने की भूमिका निभाते हैं और फिर अपने संयुक्त पुनर्निर्माण का मूल पाठ से मिलान करते हैं।
साथी ‘क’ वाक्य 1 को बोलकर पढ़ता है, जबकि साथी ‘ख’ उसे सुनकर लिखता है।
इसके बाद साथी ‘ख’ वाक्य 2 को बोलकर पढ़ता है, जबकि साथी ‘क’ उसे सुनकर लिखता है।
दोनों साथी तब तक वाचक और लेखक की भूमिकाएँ बारी-बारी से बदलते रहते हैं, जब तक सभी दस वाक्य पूरे नहीं हो जाते; इस प्रकार गतिविधि के दौरान प्रत्येक साथी दोनों भूमिकाएँ निभाता है।
अंत में, दोनों साथी अपने द्वारा संयुक्त रूप से पुनर्निर्मित कहानी की तुलना मूल कहानी से करते हैं।
‘पारस्परिक लेखन’ आदान-प्रदान के केवल लेखन-पक्ष को व्यक्त करता है; इससे यह स्पष्ट नहीं होता कि प्रत्येक साथी बारी-बारी से पढ़ने/श्रुतलेख देने की भूमिका भी निभाता है।
‘पारस्परिक श्रवण’ आदान-प्रदान के केवल श्रवण-पक्ष को व्यक्त करता है; इससे भी प्रत्येक साथी द्वारा बारी-बारी से निभाई जाने वाली पढ़ने/श्रुतलेख देने की भूमिका स्पष्ट नहीं होती।
‘वाक्य श्रुतलेख’ एकदिशीय आदान-प्रदान को व्यक्त करता है, जिसमें एक ही वाचक श्रोताओं को श्रुतलेख देता है; यह यहाँ दिखाई देने वाले सहपाठियों के बीच भूमिका-परिवर्तन को व्यक्त नहीं करता।
चूँकि दोनों साथी बारी-बारी से श्रुतलेख देते हैं अर्थात् बोलकर पढ़ते हैं और सुनकर लिखते हैं तथा फिर संयुक्त रूप से अपने कार्य का स्रोत-पाठ से मिलान करते हैं, इसलिए यह गतिविधि पारस्परिक श्रुतलेख का अभ्यास है।