व्याकरण सिखाने का कौन-सा उपागम इस मत को प्रोत्साहित करता है कि भाषा अधिगम…
2023
व्याकरण सिखाने का कौन-सा उपागम इस मत को प्रोत्साहित करता है कि भाषा अधिगम नियमों को सीखने से संबंधित है ?
- A.
व्याकरण अनुवाद
- B.
निगमनात्मक
- C.
आगमनात्मक
- D.
सम्प्रेषणात्मक
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Correct answer: B
भाषा-शिक्षण में व्याकरण पढ़ाने के दो प्रमुख उपागम हैं — निगमनात्मक (Deductive) और आगमनात्मक (Inductive) — जो इस बात से संबंधित हैं कि नियम किस क्रम में प्रस्तुत किया जाता है। निगमनात्मक उपागम में शिक्षक पहले नियम स्पष्ट रूप से बताता है, फिर उदाहरणों के माध्यम से अभ्यास कराया जाता है — अर्थात यह उपागम इस मान्यता पर आधारित है कि भाषा सीखना नियमों को सीखने से जुड़ा है। इसके विपरीत आगमनात्मक उपागम में शिक्षार्थी उदाहरणों का अवलोकन करके स्वयं नियम खोजते हैं। यद्यपि व्याकरण-अनुवाद पद्धति में भी नियम प्रायः स्पष्ट रूप से समझाए जाते हैं, परीक्षा में प्रयुक्त शब्द "उपागम" विशेष रूप से नियम-प्रस्तुतीकरण के क्रम (निगमनात्मक बनाम आगमनात्मक) को इंगित करता है, जबकि व्याकरण-अनुवाद को एक व्यापक शिक्षण "पद्धति" के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, न कि नियम-प्रस्तुतीकरण उपागम के रूप में -- यही कारण है कि निगमनात्मक उपागम को इस प्रश्न का विशिष्ट अपेक्षित उत्तर माना जाता है।
प्रश्न में पूछा गया है कि व्याकरण सिखाने का कौन-सा उपागम इस मत को बढ़ावा देता है कि भाषा अधिगम नियमों को सीखने से संबंधित है। चूँकि निगमनात्मक उपागम नियम-केंद्रित शिक्षण पद्धति है — पहले नियम बताया जाता है और फिर उसका प्रयोग कराया जाता है — यह ठीक उसी मत को दर्शाता है कि भाषा सीखना नियमों को सीखने की प्रक्रिया है। अतः सही उत्तर निगमनात्मक उपागम है।
व्याकरण अनुवाद: यह एक व्यापक शिक्षण पद्धति है जो मातृभाषा और लक्ष्य भाषा के बीच अनुवाद, शब्दावली व नियम-सूचियों के संस्मरण, तथा लिखित पाठों के विश्लेषण पर आधारित है — यह किसी विशेष नियम-प्रस्तुतीकरण क्रम के बजाय अपनी अनुवाद-केंद्रित तकनीक से परिभाषित होती है।
आगमनात्मक: इसमें शिक्षार्थी उदाहरणों से स्वयं नियम निकालते हैं; नियम को आरंभ में सीधे नहीं बताया जाता।
सम्प्रेषणात्मक: यह उपागम अर्थपूर्ण संप्रेषण और वास्तविक प्रयोग पर बल देता है, नियम-स्पष्टीकरण पर नहीं।