उच्च प्राथमिक स्तर पर हिंदी भाषा-शिक्षण का उद्देश्य नहीं है—
2019
उच्च प्राथमिक स्तर पर हिंदी भाषा-शिक्षण का उद्देश्य नहीं है—
- A.
सरसरी तौर पर किसी पाठ को देखकर उसकी विषय-वस्तु का पता करना।
- B.
निजी अनुभवों के आधार पर भाषा का सृजनशील इस्तेमाल करना।
- C.
भाषा की बारीकियों और सौंदर्यबोध को समझने के लिए हिंदी व्याकरण को केंद्र में रखना।
- D.
विभिन्न साहित्यिक विधाओं और ज्ञान से संबंधित अन्य विषयों की समझ का विकास करना।
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Correct answer: C
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एन.सी.एफ. 2005) के अनुसार, उच्च प्राथमिक स्तर पर भाषा-शिक्षण का मूल उद्देश्य शिक्षार्थी में संप्रेषण-क्षमता, भाषा के सृजनात्मक व कार्यात्मक प्रयोग, तथा विविध पाठ्य-सामग्री एवं साहित्यिक विधाओं की समझ विकसित करना है। इस दृष्टिकोण में व्याकरण को भाषा-प्रयोग के साथ अंतर्निहित एवं प्रासंगिक रूप में सिखाया जाना अपेक्षित है, न कि एक पृथक व स्वतंत्र लक्ष्य के रूप में।
दिए गए विकल्पों की जाँच इसी सिद्धांत के आधार पर करने पर—
सरसरी तौर पर पाठ देखकर विषय-वस्तु का पता लगाना एक पठन-कौशल (स्किमिंग) है, जो संप्रेषण-दक्षता विकसित करने के उद्देश्य से मेल खाता है।
निजी अनुभवों के आधार पर भाषा का सृजनशील प्रयोग करना सृजनात्मक भाषा-प्रयोग के उद्देश्य से सीधे मेल खाता है।
भाषा की बारीकी व सौंदर्यबोध हेतु व्याकरण को केंद्रित करना इस दृष्टिकोण में व्याकरण को एक पृथक, स्वतंत्र लक्ष्य के रूप में केंद्र-बिंदु बना देता है — जो ऊपर बताई गई अवधारणा (व्याकरण के अंतर्निहित व प्रासंगिक शिक्षण) के विपरीत है।
विभिन्न साहित्यिक विधाओं व ज्ञान-संबंधी विषयों की समझ विकसित करना साहित्यिक-बोध सम्बन्धी उद्देश्य से सीधे मेल खाता है।
अतः स्पष्ट है कि शेष तीन विकल्प एन.सी.एफ.-अनुमोदित उद्देश्यों से सीधे संगत हैं, जबकि व्याकरण-केंद्रित विकल्प इनसे असंगत होने के कारण ही उच्च प्राथमिक स्तर पर हिंदी भाषा-शिक्षण का उद्देश्य "नहीं" है।