नैदानिक परीक्षणों का प्रयोग किसके आकलन के लिए किया जाता है?
2023
नैदानिक परीक्षणों का प्रयोग किसके आकलन के लिए किया जाता है?
- A.
पाठ्य-वस्तु के मुख्य बिंदुओं का सारांशीकरण करने की योग्यता
- B.
शिक्षार्थी की अपनी भाषा संबंधी गलतियों को स्वयं पहचानने की योग्यता
- C.
शिक्षार्थियों को उपलब्धियों के क्रम में श्रेणीबद्ध करना
- D.
शिक्षार्थी के भाषा के मजबूत और कमजोर बिंदु
Show answer & explanation
Correct answer: D
नैदानिक परीक्षण (Diagnostic Test) मूल्यांकन का वह रूप है जो किसी शिक्षार्थी के सीखने की प्रक्रिया में विशिष्ट कठिनाइयों, त्रुटियों और दक्षता क्षेत्रों की गहराई से पहचान करता है, ताकि उपचारात्मक शिक्षण (remedial teaching) की उचित योजना बनाई जा सके। यह सामान्य उपलब्धि परीक्षणों (achievement tests) से भिन्न होता है, जो प्रायः समग्र उपलब्धि या तुलनात्मक रैंकिंग पर केंद्रित होते हैं।
प्रस्तुत प्रश्न में, नैदानिक परीक्षण का उपयोग शिक्षार्थी की भाषा दक्षता के मूल्यांकन के लिए किया जाता है — विशेष रूप से यह पहचानने के लिए कि शिक्षार्थी किन भाषिक क्षेत्रों में सक्षम (मजबूत) है और किन क्षेत्रों में उसे अतिरिक्त सहायता (कमजोर बिंदु) की आवश्यकता है।
शेष विकल्प मूल्यांकन के अन्य उद्देश्यों को दर्शाते हैं, जो नैदानिक परीक्षण की परिभाषा से भिन्न हैं:
पाठ्य-वस्तु के मुख्य बिंदुओं का सारांशीकरण करना एक बोधगम्यता (comprehension) कौशल है, जिसे सामान्यतः उपलब्धि परीक्षणों द्वारा जाँचा जाता है।
शिक्षार्थी द्वारा अपनी भाषा-त्रुटियों की स्वयं पहचान करना एक आत्म-मूल्यांकन (self-assessment) की मेटाकॉग्निटिव क्षमता है, न कि परीक्षक द्वारा किए गए मूल्यांकन का उद्देश्य।
शिक्षार्थियों को उपलब्धियों के क्रम में श्रेणीबद्ध करना मानक-संदर्भित मूल्यांकन (norm-referenced evaluation) की विशेषता है, जो शिक्षार्थियों की आपसी तुलना पर आधारित होती है, न कि व्यक्तिगत कठिनाइयों की पहचान पर।
अतः नैदानिक परीक्षण का मूल उद्देश्य शिक्षार्थी की भाषा संबंधी दक्षता में उसके मजबूत और कमजोर बिंदुओं की पहचान करना है, जिससे लक्षित उपचारात्मक शिक्षण संभव हो सके।