निर्देश - निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न सं. (51) और (52) का विकल्प…
2019
निर्देश - निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न सं. (51) और (52) का विकल्प चुनिए ।
कला और जीवन का सम्बन्ध अन्योन्याश्रित हैं। कलाकार, कल्पना और यथार्थ का समन्वय कर समाज के समक्ष आदर्श रूप प्रस्तुत करता है। इसी कारण जीवन का कला के स्वरूप पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। कलाकार जीवन के यथार्थ रूप को ही चित्रित नहीं करता, वरन् वह आदर्श रूप को भी प्रस्तुत करता है। इस प्रकार जीवन का कला पर और कला का जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। कलावाद अर्थात् कला, कला के लिए सम्बन्धी विचारों में जीवन के लिए उपयोगी कला ही श्रेयस्कर मानी गई है।
52.कौन-सी कला श्रेष्ठ मानी गई है ?
Answer: D. जो जीवनोपयोगी हो। — गद्यांश-आधारित प्रश्नों में सही विकल्प वही होता है जिसका सीधा समर्थन गद्यांश की किसी स्पष्ट पंक्ति में मिलता है; शेष विकल्प गद्यांश के अन्य अंशों से…
- A.
जो कलावाद पर आधारित हो।
- B.
जो प्रकृति का चित्रण करती हो।
- C.
जो कल्पना पर आधारित हो।
- D.
जो जीवनोपयोगी हो।
Attempted by 14 students.
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Correct answer: D
गद्यांश-आधारित प्रश्नों में सही विकल्प वही होता है जिसका सीधा समर्थन गद्यांश की किसी स्पष्ट पंक्ति में मिलता है; शेष विकल्प गद्यांश के अन्य अंशों से मिलते-जुलते शब्द लेकर भ्रम पैदा करते हैं, भले ही वे उस विशेष प्रश्न का उत्तर न हों।
गद्यांश के अंतिम वाक्य में स्पष्ट कहा गया है - "कलावाद अर्थात् कला, कला के लिए सम्बन्धी विचारों में जीवन के लिए उपयोगी कला ही श्रेयस्कर मानी गई है।" अर्थात् विभिन्न विचारों में से केवल वही कला श्रेष्ठ मानी गई है जो जीवन के लिए उपयोगी हो।
"कलावाद पर आधारित" कला उसी विचारधारा का नाम है जिसका गद्यांश में उल्लेख करते हुए एक भिन्न कसौटी को श्रेष्ठ बताया गया है, इसलिए यह गद्यांश के कथन से मेल नहीं खाता।
गद्यांश में प्रकृति-चित्रण की श्रेष्ठता का कहीं कोई उल्लेख नहीं है; गद्यांश केवल कला-जीवन के अन्योन्याश्रित सम्बन्ध और उपयोगिता की बात करता है।
गद्यांश में कल्पना का उल्लेख केवल यथार्थ के साथ समन्वय की प्रक्रिया के रूप में हुआ है ("कलाकार, कल्पना और यथार्थ का समन्वय" करता है) - यह कलाकार की रचना-पद्धति का वर्णन है, श्रेष्ठता की शर्त नहीं।
अतः गद्यांश के स्पष्ट कथन के अनुसार, जीवनोपयोगी कला को ही श्रेष्ठ माना गया है।
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