निर्देश: दिए गए गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।…
2018
निर्देश: दिए गए गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प छाँटिए।
स्पष्टता, आत्म-विश्वास, विषय की अच्छी पकड़ और प्रभावशाली भाषा में अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करना ही सम्प्रेषण-कला है, जो निरंतर अभ्यास से निखारी जा सकती है। एक दिन में कोई अच्छा वक्ता नहीं बन सकता तथा भाषा पर अनायास ही किसी की पकड़ नहीं हो पाती। इसी अभ्यास से स्वामी विवेकानंद ने जिस सम्प्रेषण-कला का विकास किया था, उसने विश्वधर्म-सम्मेलन में लाखों अमेरिका-निवासियों को चकित और मोहित कर दिया था।
सम्प्रेषण-कला का विकास किससे होता है?
Answer: A. अभ्यास — अवधारणागद्यांश-आधारित बोध में उत्तर गद्यांश में दिए गए किसी स्पष्ट कथन अथवा उससे निकलने वाले अनिवार्य निष्कर्ष पर आधारित होना चाहिए, बाहरी ज्ञान पर नहीं। जब…
- A.
अभ्यास
- B.
भाषण
- C.
अनायास
- D.
विषय की अच्छी पकड़
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Correct answer: A
अवधारणा
गद्यांश-आधारित बोध में उत्तर गद्यांश में दिए गए किसी स्पष्ट कथन अथवा उससे निकलने वाले अनिवार्य निष्कर्ष पर आधारित होना चाहिए, बाहरी ज्ञान पर नहीं।
जब किसी प्रश्न में पूछा जाए कि किसी कौशल का विकास किससे होता है, तब ‘विकसित’, ‘निखरा’ अथवा ‘उन्नत’ जैसे शब्दों से संबद्ध कारण या प्रक्रिया की पहचान की जाती है।
अनुप्रयोग
गद्यांश में कहा गया है कि निरंतर अभ्यास से सम्प्रेषण-कला को निखारा जा सकता है। आगे स्वामी विवेकानंद द्वारा इसी अभ्यास से इस कला का विकास किए जाने का उल्लेख इस कारण की पुष्टि करता है।
तुलना
भाषण वह रूप है जिसमें सम्प्रेषण अभिव्यक्त किया जा सकता है; यह गद्यांश में उल्लिखित विकास की प्रक्रिया नहीं है।
अनायास का अर्थ बिना सचेत प्रयास के है, जबकि गद्यांश में निरंतर प्रयास पर बल दिया गया है।
विषय की अच्छी पकड़ प्रभावी अभिव्यक्ति की एक विशेषता है, कौशल विकसित करने वाली वर्णित प्रक्रिया नहीं।
पुनः-जाँच
दोनों प्रासंगिक वाक्य एक ही कारण की ओर संकेत करते हैं: निरंतर अभ्यास।
निष्कर्ष
अतः अपेक्षित उत्तर है—“अभ्यास।”
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