"शिक्षार्थियों को समृद्ध भाषायी परिवेश मिलना चाहिए और गलतियाँ इस बात का…
2024
"शिक्षार्थियों को समृद्ध भाषायी परिवेश मिलना चाहिए और गलतियाँ इस बात का साक्ष्य हैं कि अधिगम हो रहा है।" यह किसके द्वारा अनुशंसित है?
- A.
व्यवहारवादी
- B.
संज्ञानात्मकवादी
- C.
मानवतावादी
- D.
मनोविश्लेषणवादी
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Correct answer: B
भाषा-अधिगम के सिद्धांत यह स्पष्ट करते हैं कि कोई बच्चा अपनी प्रथम भाषा में प्रवाह कैसे विकसित करता है। संज्ञानात्मकवादी/जन्मजातवादी सिद्धांतों का मानना है कि बच्चे भाषा की जन्मजात संज्ञानात्मक क्षमता के साथ पैदा होते हैं और एक सक्रिय, परिकल्पना-परीक्षण प्रक्रिया के माध्यम से भाषायी दक्षता विकसित करते हैं। इन सिद्धांतों की जड़ें नोम चॉम्स्की की भाषा अर्जन युक्ति और सार्वभौमिक व्याकरण की अवधारणाओं में हैं। बच्चे भाषा के संबंध में अंतर्निहित नियम बनाते हैं, बोलते समय उन्हें आजमाते हैं और जब वे नियम सुनी गई भाषायी सामग्री से मेल नहीं खाते, तो उनमें संशोधन करते हैं। इसलिए त्रुटि को इस बात का वस्तुनिष्ठ साक्ष्य माना जाता है कि अधिगम सक्रिय रूप से हो रहा है—यह दर्शाती है कि किसी नियम को परखा और परिष्कृत किया जा रहा है—न कि ऐसी बुरी आदत, जिसे सुधारना आवश्यक हो। इसी कारण संज्ञानात्मकवादी शिक्षाशास्त्र शिक्षार्थियों को समृद्ध भाषायी परिवेश प्रदान करने पर बल देता है: भाषायी संपर्क वह मूल सामग्री उपलब्ध कराता है, जिस पर शिक्षार्थी का अपना संज्ञानात्मक तंत्र कार्य करता है।
प्रश्न में दिया गया कथन—कि शिक्षार्थियों को समृद्ध भाषायी परिवेश की आवश्यकता होती है और गलतियाँ सिद्ध करती हैं कि अधिगम चल रहा है—इस संज्ञानात्मकवादी मान्यता से पूरी तरह मेल खाता है। त्रुटियों को सक्रिय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण अर्थात् नियम-निर्माण और संशोधन के संकेत के रूप में देखा जाता है तथा समृद्ध भाषायी सामग्री इसी प्रक्रिया को पोषित करती है। यह व्यवहारवादी दृष्टिकोण के ठीक विपरीत है, जिसमें त्रुटि केवल एक गलत प्रतिक्रिया होती है, जिसे पुनर्बलन द्वारा सुधारना होता है, और परिवेश का महत्त्व केवल उद्दीपन-प्रतिक्रिया अनुबंधन के स्रोत के रूप में होता है, न कि विचार-निर्माण के स्रोत के रूप में।
व्यवहारवादी: गलती को ऐसी गलत प्रतिक्रिया मानता है, जिसे पुनर्बलन और अभ्यास द्वारा सुधारना होता है, न कि इस बात का प्रमाण कि अधिगम हो रहा है—यह कथन में प्रस्तुत दृष्टिकोण के ठीक विपरीत है।
मानवतावादी: भाषा-अधिगम के दौरान त्रुटियाँ उत्पन्न होने की संज्ञानात्मक प्रक्रिया के बजाय भावनात्मक विकास, आत्मसिद्धि तथा शिक्षार्थी की भावात्मक और अभिप्रेरणात्मक आवश्यकताओं को केंद्र में रखता है।
मनोविश्लेषणवादी: भाषा के नियमों के अधिगम की संज्ञानात्मक प्रक्रिया या त्रुटियों के शैक्षणिक महत्त्व के बजाय व्यक्तित्व को आकार देने वाली अचेतन प्रेरणाओं और बाल्यकालीन अनुभवों पर ध्यान केंद्रित करता है।
अतः वर्णित दृष्टिकोण—समृद्ध भाषायी परिवेश तथा सक्रिय अधिगम के साक्ष्य के रूप में त्रुटियाँ—भाषा-अधिगम के संबंध में संज्ञानात्मकवादी मत है।