पाठ के आरंभ में एक अध्यापक ने अपनी कक्षा के शिक्षार्थियों को समूहों में बाँटा…

2024

पाठ के आरंभ में एक अध्यापक ने अपनी कक्षा के शिक्षार्थियों को समूहों में बाँटा और कहा कि अभी हाल ही में पढ़े गए समाचार पत्र के रुचिकर आलेख के बारे में बात करें। बोलने की यह गतिविधि किसलिए है?

  1. A.

    मौखिक प्रवाह अभ्यास

  2. B.

    नियंत्रित मौखिक अभ्यास

  3. C.

    निर्देशित मौखिक अभ्यास

  4. D.

    सक्रिय श्रवण

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Correct answer: A

अवधारणा

भाषा शिक्षण में बोलने के अभ्यासों को सामान्यतः तीन श्रेणियों में बांटा जाता है — नियंत्रित अभ्यास (Controlled Practice), निर्देशित अभ्यास (Guided Practice), और मुक्त/प्रवाह अभ्यास (Free/Fluency Practice)। नियंत्रित अभ्यास में शिक्षार्थी किसी निश्चित भाषिक संरचना का दोहराव अभ्यास करते हैं और उत्तर लगभग तय होता है; निर्देशित अभ्यास में शिक्षक वाक्य-रूपरेखा या संकेत देकर सीमित सहारे के साथ बोलने का अभ्यास कराता है; जबकि मुक्त/प्रवाह अभ्यास में शिक्षार्थियों को बिना किसी भाषिक बंधन के अपने विचार व्यक्त करने दिए जाते हैं, जिसका उद्देश्य सटीकता से अधिक सहज व निरंतर संप्रेषण (fluency) विकसित करना होता है।

अनुप्रयोग

दिए गए परिदृश्य में अध्यापक ने शिक्षार्थियों को समूहों में बाँटकर हाल ही में पढ़े गए समाचार पत्र के किसी रोचक आलेख पर खुलकर बात करने को कहा। इसमें न तो किसी निश्चित भाषिक संरचना का अभ्यास कराया जा रहा है, न ही कोई वाक्य-रूपरेखा या संकेत दिए गए हैं — शिक्षार्थी अपने शब्दों में स्वतंत्र रूप से विचार साझा कर रहे हैं। यह खुलापन और विषय पर स्वतंत्र चर्चा इस गतिविधि को मौखिक प्रवाह विकसित करने की गतिविधि बनाती है, जहाँ लक्ष्य सहज और सतत संप्रेषण है, न कि किसी विशिष्ट भाषिक रूप की शुद्धता।

तुलना

  • नियंत्रित मौखिक अभ्यास: इसमें आमतौर पर किसी विशिष्ट व्याकरणिक रूप या वाक्य-पैटर्न को बार-बार दोहराने वाला संरचित ड्रिल होता है; यहाँ शिक्षार्थियों को ऐसी किसी निश्चित संरचना का पालन करने के लिए नहीं कहा गया।

  • निर्देशित मौखिक अभ्यास: इसमें शिक्षक सामान्यतः वाक्य-रूपरेखा, संकेत-शब्द या नमूना वाक्य देकर बोलने को सीमित सहारा देता है; इस गतिविधि में शिक्षार्थियों को ऐसी कोई रूपरेखा नहीं दी गई — वे पूर्णतः अपने शब्दों में बात कर रहे हैं।

  • सक्रिय श्रवण: यह एक ग्रहणात्मक (receptive) कौशल है जिसमें शिक्षार्थी बोली गई विषय-वस्तु को ध्यान से सुनकर समझने पर केंद्रित होते हैं; इस गतिविधि में शिक्षार्थियों से स्वयं बोलने/उत्पादन करने की अपेक्षा की गई है, सुनने भर की नहीं।

इस प्रकार, बिना किसी भाषिक बंधन के समूह में स्वतंत्र चर्चा कराने वाली यह गतिविधि मौखिक प्रवाह अभ्यास की श्रेणी में आती है।

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