नाटक शिक्षण की उपयुक्त विधि है
2013
नाटक शिक्षण की उपयुक्त विधि है
- A.
कक्षाभिनय प्रणाली
- B.
रंगमंच प्रणाली
- C.
अर्थबोध प्रणाली
- D.
व्याख्या प्रणाली
Attempted by 4 students.
Show answer & explanation
Correct answer: A
नाटक शिक्षण की दो प्रमुख विधियाँ मानी जाती हैं — रंगमंच प्रणाली, जिसमें वास्तविक मंच, वेशभूषा व पूर्वाभ्यास के साथ सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाता है (जैसे विद्यालय के वार्षिकोत्सव में); और कक्षाभिनय प्रणाली, जिसमें कक्षा-कक्ष के सीमित स्थान व संसाधनों में ही विद्यार्थी पात्रों की भूमिका निभाकर पाठ को अभिनीत करते हैं। नियमित कक्षा-शिक्षण के लिए कक्षाभिनय प्रणाली को ही व्यावहारिक व उपयुक्त विधि माना गया है।
चूँकि यहाँ सामान्य कक्षा-परिवेश में नाटक शिक्षण की उपयुक्त विधि पूछी गई है — न कि किसी विशेष मंच-प्रदर्शन की — अतः बिना किसी अतिरिक्त मंच-व्यवस्था, वेशभूषा या पूर्वाभ्यास के, कक्षा में उपलब्ध स्थान में ही अभिनय द्वारा पाठ पढ़ाने वाली विधि सही उत्तर है।
रंगमंच प्रणाली के लिए वास्तविक मंच, वेशभूषा व पूर्वाभ्यास आवश्यक है — यह विशेष अवसरों (वार्षिकोत्सव) के लिए है, नियमित कक्षा-शिक्षण के लिए नहीं।
अर्थबोध प्रणाली गद्य/पद्य के अर्थ-ग्रहण व बोध-शिक्षण की विधि है, अभिनय-आधारित नहीं।
व्याख्या प्रणाली में शिक्षक द्वारा पाठ की मौखिक व्याख्या दी जाती है, जिसमें विद्यार्थियों की सक्रिय अभिनय-भागीदारी नहीं होती।