पठन सिखाने के उस तरीके को क्या कहा जाता है जिसमें शब्दों के अर्थ को प्रयुक्त…
2023
पठन सिखाने के उस तरीके को क्या कहा जाता है जिसमें शब्दों के अर्थ को प्रयुक्त संदर्भों के अनुसार समझने पर बल दिया जाता है ?
- A.
संरचनात्मक उपागम
- B.
सम्प्रेषणात्मक उपागम
- C.
अधोमुखी (बॉटम-अप) उपागम
- D.
समग्र भाषा उपागम
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Correct answer: D
पठन-शिक्षण के सैद्धांतिक मॉडलों को व्यापक रूप से दो प्रक्रिया-दिशाओं में देखा जाता है — अधोमुखी (बॉटम-अप) मॉडल, जो अक्षर/ध्वनि (फ़ोनिक्स) जैसी छोटी इकाइयों की पहचान से शुरू होकर क्रमशः शब्द व वाक्य तक बढ़ता है, और ऊर्ध्वमुखी (टॉप-डाउन) मॉडल, जो समग्र संदर्भ व पूर्व-ज्ञान के आधार पर अर्थ-निर्माण से शुरू होकर छोटी इकाइयों की ओर बढ़ता है। समग्र भाषा (व्होल लैंग्वेज) उपागम इसी ऊर्ध्वमुखी, अर्थ-केंद्रित दर्शन पर आधारित एक शिक्षण उपागम है, जिसमें भाषा को एक अखंड इकाई मानकर शब्दों का अर्थ प्रयुक्त संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) के आधार पर ग्रहण किया जाता है, न कि पृथक् वर्णों के विश्लेषण से।
प्रश्न में वर्णित विशेषता — शब्दों के अर्थ को प्रयुक्त संदर्भों के अनुसार समझने पर बल — ऊर्ध्वमुखी (टॉप-डाउन), अर्थ-केंद्रित दर्शन की पहचान है, और समग्र भाषा उपागम ठीक इसी दर्शन को मूर्त रूप देता है, क्योंकि यह उपागम पाठ को समग्र संदर्भ में समझने और अर्थ-निर्माण (मीनिंग-मेकिंग) पर बल देता है, न कि पृथक्-पृथक् कौशलों के क्रमबद्ध अभ्यास पर। अतः सही उत्तर 'समग्र भाषा उपागम' है।
संरचनात्मक उपागम — भाषा की व्याकरणिक संरचनाओं और नियमों के क्रमबद्ध अभ्यास पर केंद्रित होता है, संदर्भ-आधारित अर्थ-ग्रहण पर नहीं।
सम्प्रेषणात्मक उपागम — भाषा के वास्तविक सामाजिक प्रयोग और सम्प्रेषण-क्षमता विकसित करने पर बल देता है, शब्दार्थ को संदर्भ से जोड़ने पर केंद्रित नहीं।
अधोमुखी (बॉटम-अप) उपागम — अधोमुखी प्रक्रिया-दिशा का उदाहरण है: पठन को अक्षर/ध्वनि पहचान से आरंभ कर क्रमशः शब्द व वाक्य स्तर तक ले जाता है, अर्थात भाग से पूर्ण की ओर बढ़ता है, समग्र संदर्भ से अर्थ-ग्रहण के विपरीत दिशा में।
CBSE द्वारा जारी CTET अगस्त 2023, पेपर-I की आधिकारिक उत्तर-कुंजी में भी इसी विकल्प (समग्र भाषा उपागम) की पुष्टि की गई है।