गद्य शिक्षण में अपेक्षित नहीं है –

2021

गद्य शिक्षण में अपेक्षित नहीं है –

  1. A.

    भाषा की बारीकियाँ समझना

  2. B.

    कल्पनाशीलता का विकास

  3. C.

    तार्किक शक्ति का विकास

  4. D.

    अनुकरण क्षमता का विकास

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Correct answer: D

गद्य शिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषा की बारीकियों को समझने, तार्किक/चिंतन शक्ति विकसित करने और वर्णित विषय-वस्तु की कल्पना कर उससे जुड़ने की क्षमता विकसित करना है, ताकि वे गद्यांश को पढ़कर समझ और विश्लेषण कर सकें। इसके विपरीत, अनुकरण क्षमता का विकास परम्परागत रूप से पद्य शिक्षण का उद्देश्य माना जाता है, जिसमें छात्र शिक्षक के उच्चारण, स्वराघात और लय का अनुकरण करते हुए सस्वर वाचन का अभ्यास करते हैं।

दिए गए प्रश्न में — भाषा की बारीकियाँ समझना, कल्पनाशीलता का विकास और तार्किक शक्ति का विकास — तीनों गद्य शिक्षण के मान्य उद्देश्य हैं, क्योंकि ये गद्यांश की समझ, विश्लेषण और भावानुभूति से सीधे जुड़े हैं। परन्तु अनुकरण क्षमता का विकास गद्य शिक्षण की इस सूची में सम्मिलित नहीं है, क्योंकि यह क्षमता वाचन-शैली के अनुकरण से सम्बन्धित है, न कि गद्य के पठन-विश्लेषण से।

  • भाषा की बारीकियाँ समझना — शब्दों व वाक्यों के अर्थ-भेद को पहचानने की क्षमता; गद्य शिक्षण का प्रत्यक्ष उद्देश्य।

  • कल्पनाशीलता का विकास — वर्णित दृश्यों व भावों की मानसिक छवि बनाने की क्षमता; गद्य शिक्षण में भी अपेक्षित।

  • तार्किक शक्ति का विकास — कारण-परिणाम व तर्क-श्रृंखला का विश्लेषण करने की क्षमता; गद्य शिक्षण का मूल उद्देश्य।

  • अनुकरण क्षमता का विकास — किसी प्रतिरूप के उच्चारण व लय को यथावत् दोहराने की क्षमता; यह विशेष रूप से पद्य (सस्वर वाचन) शिक्षण से जुड़ी है, गद्य शिक्षण से नहीं।

अतः 'अनुकरण क्षमता का विकास' गद्य शिक्षण में अपेक्षित नहीं है — यही प्रश्न का सही उत्तर है।

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