व्याकरण-शिक्षण के लिए उपयुक्त नहीं है—
2016
व्याकरण-शिक्षण के लिए उपयुक्त नहीं है—
- A.
आगमन प्रणाली
- B.
निगमन प्रणाली
- C.
अव्याकृति प्रणाली
- D.
कक्षाभिनय प्रणाली
Attempted by 4 students.
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Correct answer: D
अवधारणा
व्याकरण-शिक्षण विधियाँ वे प्रविधियाँ हैं जो शिक्षार्थियों को भाषा के नियमों को समझने या आत्मसात कराने के लिए विशेष रूप से बनाई जाती हैं — ये उन प्रविधियों से भिन्न होती हैं जिनका उद्देश्य मौखिक अभिव्यक्ति, साहित्य-बोध या अभिनय-कौशल विकसित करना है। कोई प्रविधि तभी 'व्याकरण-शिक्षण' कहलाती है जब वह उदाहरणों, कथित नियमों या भाषा-अनावरण के माध्यम से नियम-तंत्र तक पहुँचने का कोई संरचित मार्ग देती हो।
अनुप्रयोग
दिए गए चार विकल्पों में से तीन सीधे व्याकरणिक नियमों पर कार्य करते हैं: एक में शिक्षार्थी उदाहरणों से नियम निष्कर्षित करता है, एक में नियम पहले बताकर बाद में उदाहरणों द्वारा लागू कराया जाता है, और एक में सही भाषा-प्रयोग के बार-बार सम्पर्क से नियम अनायास ग्रहण करा दिया जाता है। चौथी प्रविधि में इसके विपरीत विद्यार्थी संवाद व भाव-भंगिमा के माध्यम से भूमिका निभाते हैं — इसका लक्ष्य मौखिक अभिव्यक्ति व साहित्यिक/नाट्य-सहभागिता विकसित करना है, न कि व्याकरणिक नियम पढ़ाना या दृढ़ करना। यही वह प्रविधि है जो व्याकरण-शिक्षण के लिए उपयुक्त नहीं है।
तुलनात्मक जाँच
चारों विकल्पों की तुलना इस आधार पर कि प्रत्येक वास्तव में क्या विकसित करता है:
आगमन प्रणाली — उदाहरणों से नियम निष्कर्षित: एक मान्य व्याकरण-शिक्षण प्रणाली।
निगमन प्रणाली — पहले नियम, फिर उदाहरण: यह भी मान्य व्याकरण-शिक्षण प्रणाली।
अव्याकृति प्रणाली — शुद्ध भाषा-प्रयोग के सम्पर्क से नियम अनायास ग्रहण: यह भी व्याकरणिक क्षमता विकसित करती है।
कक्षाभिनय प्रणाली — संवाद व भाव-भंगिमा द्वारा भूमिका-निर्वाह: मौखिक अभिव्यक्ति व नाट्य-कौशल विकसित करती है, व्याकरण-नियम सिखाना नहीं।
अतः दिए गए विकल्पों में केवल कक्षाभिनय (भूमिका-निर्वाह) प्रणाली ही व्याकरण-शिक्षण के लिए उपयुक्त नहीं है; शेष तीनों व्याकरण पढ़ाने की मानक प्रणालियाँ हैं।