‘स्त्री को सौंदर्य का प्रतिमान बना दिया जाना ही उसका बंधन बन जाता है।’ – इस…

2019

‘स्त्री को सौंदर्य का प्रतिमान बना दिया जाना ही उसका बंधन बन जाता है।’ – इस विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए। भाषा की पाठ्य-पुस्तक में इस प्रश्न को स्थान देने का क्या औचित्य है?

  1. A.

    सौंदर्य-प्रतिमान बनाना।

  2. B.

    स्त्री-बंधन की चर्चा करना।

  3. C.

    सौंदर्य प्रसाधनों का विरोध करना।

  4. D.

    भाषा को स्त्री विमर्श से जोड़ना।

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Correct answer: D

भाषा शिक्षण में पाठ्य-पुस्तक में दिए गए चर्चा-आधारित प्रश्नों का उद्देश्य केवल विषय-वस्तु की समझ जाँचना नहीं होता, बल्कि भाषा-प्रयोग को छात्रों के सामाजिक अनुभव और विमर्शों से जोड़ना होता है। ऐसे प्रश्न भाषा को समाज में व्याप्त मुद्दों (जैसे लिंग-समानता) पर आलोचनात्मक चिंतन का माध्यम बनाते हैं — यही भाषा-शिक्षण की सामाजिक भूमिका का मूल सिद्धांत है।

दिया गया कथन स्त्री को सौंदर्य के प्रतिमान में बाँधे जाने को उसका बंधन बताता है — यह एक स्त्री-विमर्श से जुड़ा मुद्दा है। इस प्रश्न को पाठ्य-पुस्तक में शामिल करने का औचित्य विषय को दोहराना नहीं, बल्कि भाषा शिक्षण को स्त्री-विमर्श (सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर विचार) से जोड़ना है, ताकि छात्र भाषा के माध्यम से समाज को आलोचनात्मक दृष्टि से देखना सीखें। इसलिए सही विकल्प वह है जो भाषा को स्त्री-विमर्श से जोड़ने की बात करता है।

  • "सौंदर्य-प्रतिमान बनाना" — यह कथन में उल्लिखित विषय-वस्तु (स्त्री को सौंदर्य का प्रतिमान बनाना) का ही दोहराव है, यह पाठ्य-पुस्तक में प्रश्न शामिल करने का शैक्षिक औचित्य नहीं बताता।

  • "स्त्री-बंधन की चर्चा करना" — यह भी चर्चा के विषय (बंधन) को ही दोहराता है, न कि भाषा-शिक्षण के व्यापक उद्देश्य को स्पष्ट करता है।

  • "सौंदर्य प्रसाधनों का विरोध करना" — यह कथन और प्रश्न दोनों में कहीं निहित नहीं है; एक संकुचित और असंबद्ध लक्ष्य है।

अतः भाषा की पाठ्य-पुस्तक में इस प्रश्न को शामिल करने का औचित्य भाषा को स्त्री-विमर्श से जोड़ना है।

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