निम्नलिखित कथनों को पढ़िए तथा सही विकल्प का चयन कीजिए : अभिकथन (A) :…
2023
निम्नलिखित कथनों को पढ़िए तथा सही विकल्प का चयन कीजिए :
अभिकथन (A) : शिक्षार्थी भाषा अर्जित करते हैं क्योंकि वे ऐसा करने के लिए आनुवंशिक रूप से पूर्वानुकूलित होते हैं और ऐसे में परिवेश की कोई भूमिका नहीं होती है ।
तर्क (R) : भाषा अर्जन में शिक्षार्थी-केन्द्रित कक्षायी परिवेश का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है ।
- A.
(A) ग़लत है, परन्तु (R) सही है ।
- B.
(A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या है ।
- C.
(A) और (R) दोनों सही हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है ।
- D.
(A) सही है, परन्तु (R) ग़लत है ।
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Correct answer: A
अवधारणा
भाषा अर्जन (Language Acquisition) के संबंध में शिक्षा-मनोविज्ञान में दो प्रमुख दृष्टिकोण मान्य हैं — नैटिविस्ट दृष्टिकोण (चॉम्स्की की ‘भाषा अर्जन युक्ति’/यूनिवर्सल ग्रामर) के अनुसार बालक में भाषा सीखने की जन्मजात (आनुवंशिक) क्षमता होती है, तथा सामाजिक-सांस्कृतिक/अंतःक्रियावादी दृष्टिकोण (वायगोत्स्की आदि) के अनुसार परिवेश के साथ अंतःक्रिया — विशेषतः समृद्ध भाषिक निवेश तथा शिक्षार्थी-केंद्रित कक्षायी वातावरण — भाषा अर्जन में निर्णायक भूमिका निभाता है । आधुनिक शिक्षा-मनोविज्ञान इन दोनों दृष्टिकोणों को परस्पर-पूरक मानता है, न कि परस्पर-विरोधी; अर्थात कोई भी सुस्थापित सिद्धांत परिवेश की भूमिका को पूर्णतः नकारता नहीं ।
प्रयोग
अभिकथन (A) यह दावा करता है कि भाषा अर्जन विशुद्ध आनुवंशिक पूर्वानुकूलन से होता है और परिवेश की कोई भूमिका नहीं होती — यह दावा उपर्युक्त सिद्धांत के विपरीत है (क्योंकि यह परिवेश की भूमिका को पूर्णतः खारिज करता है), अतः (A) असत्य है । तर्क (R) यह बताता है कि शिक्षार्थी-केंद्रित कक्षायी परिवेश का भाषा अर्जन पर गहरा प्रभाव पड़ता है — यह कथन शिक्षा-मनोविज्ञान के स्थापित निष्कर्षों (समृद्ध भाषिक निवेश, अंतःक्रिया के अवसर, तथा सहयोगात्मक शिक्षण की भूमिका) से पूर्णतः संगत है, अतः (R) सत्य है; वस्तुतः (R) की यही सामग्री — कि परिवेश का प्रभाव गहरा है — (A) के ‘परिवेश की कोई भूमिका नहीं’ वाले दावे का सीधा खंडन करके (A) के असत्य होने की पुष्टि भी करती है । तथापि, अभिकथन-तर्क प्रारूप में ‘सही व्याख्या’ की कसौटी तभी लागू होती है जब अभिकथन (A) स्वयं सत्य हो; चूँकि यहाँ (A) स्वयं असत्य सिद्ध हो चुका है, अतः यह प्रश्न ही नहीं उठता कि (R), (A) की व्याख्या है या नहीं — (R) एक स्वतंत्र सत्य कथन के रूप में खड़ा रहता है । अतः सही विकल्प वह है जिसमें (A) को ग़लत तथा (R) को सही बताया गया है ।
तुलना
अभिकथन को सत्य मानने वाले विकल्प (अर्थात यह मानने वाले कि परिवेश की कोई भूमिका नहीं) नैटिविस्ट सिद्धांत के एक अतिवादी, असंतुलित रूप को स्वीकारते हैं, जिसे आधुनिक शिक्षा-मनोविज्ञान समर्थन नहीं देता ।
अभिकथन और तर्क दोनों को सत्य मानकर तर्क को अभिकथन की व्याख्या बताने वाले विकल्प यह भूल करते हैं कि अभिकथन स्वयं ही असत्य है, अतः किसी सत्य कथन को उसकी ‘व्याख्या’ नहीं माना जा सकता ।
निष्कर्ष
अतः सही विकल्प वह है जिसमें (A) ग़लत तथा (R) सही बताया गया है ।