एक माँ ने इस बात की ओर ध्यान दिया कि उसकी बच्ची कभी-कभी ऐसे शब्द बोल जाती है…
2023
एक माँ ने इस बात की ओर ध्यान दिया कि उसकी बच्ची कभी-कभी ऐसे शब्द बोल जाती है जो न तो उसने कभी किसी वयस्क से सुने हैं और न ही अपने भाई-बहनों से सुने हैं। इस बात को लेकर वह भ्रमित है, क्योंकि उसका मानना है कि बच्चे अपने परिवार और आस-पास के परिवेश में लोगों का अनुकरण करके भाषा सीखते हैं। उसका यह मत किससे प्रतिध्वनित (मेल खाना) होता है ?
- A.
बहुभाषावाद
- B.
सहजवाद (प्राकृतवाद)
- C.
व्यवहारवाद
- D.
रचनावाद
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Correct answer: C
अवधारणा: भाषा-अर्जन के सिद्धांतों को मोटे तौर पर इस आधार पर दो दृष्टिकोणों में बाँटा जाता है कि बच्चे की बढ़ती शब्दावली और व्याकरण का स्रोत क्या है। व्यवहारवाद (बी. एफ. स्किनर) के अनुसार भाषा भी किसी अन्य व्यवहार की तरह पूरी तरह बाहरी परिवेश से सीखी जाती है। बच्चा अपने आस-पास की भाषा सुनता है, उसका अनुकरण करता है और सही प्रयोग पर उसे प्रबलन मिलता है; इस प्रकार परिवार और समाज से मिलने वाली पुनरावृत्ति तथा प्रतिक्रिया से उसकी भाषा धीरे-धीरे आकार लेती है। इसके विपरीत, सहजवाद (नोम चॉम्स्की) के अनुसार मनुष्य जन्म से ही एक सहज जैविक तंत्र, भाषा-अर्जन उपकरण (सार्वभौमिक व्याकरण), से युक्त होता है। किसी भी भाषा के सामान्य संपर्क में आने मात्र से यह तंत्र बच्चे को ऐसे वाक्य-रूपों को समझने और उत्पन्न करने में सक्षम बनाता है जिन्हें उसने सीधे कभी नहीं सुना होता।
अनुप्रयोग: माँ का स्पष्ट मत है कि उसकी बच्ची परिवार और आस-पास के परिवेश के लोगों का अनुकरण करके ही भाषा सीखती है, अर्थात बाहरी संपर्क और नकल ही भाषा सीखने की पूरी प्रक्रिया है। यही व्यवहारवाद का केंद्रीय दावा है; इसलिए उसका मत व्यवहारवाद से मेल खाता है।
तुलना:
बहुभाषावाद: एक से अधिक भाषाओं को जानने या उनका प्रयोग करने की क्षमता को दर्शाता है, यह किसी एक भाषा के अर्जन की प्रक्रिया का सिद्धांत नहीं है; इसलिए यह भाषा सीखने की विधि से संबंधित इस मत के अनुकूल नहीं है।
सहजवाद: माँ के मत के विपरीत यह मानता है कि भाषायी क्षमता परिवेश के अनुकरण से नहीं, बल्कि जन्मजात क्षमता से आती है।
रचनावाद (ज्याँ पियाजे): बच्चा सुनी हुई भाषा की निष्क्रिय रूप से नकल करने के बजाय अपने अनुभवों और संसार के साथ मानसिक अंतःक्रिया के माध्यम से भाषा की अपनी समझ का सक्रिय रूप से निर्माण करता है।
टिप्पणी: रोचक बात यह है कि जिस अवलोकन से माँ उलझन में है, अर्थात बच्ची का ऐसे शब्द बोलना जिन्हें उसने किसी से कभी नहीं सुना, उसी प्रकार के प्रमाण का उपयोग सहजवाद, न कि व्यवहारवाद, जन्मजात क्षमता के पक्ष में तर्क देने के लिए करता है। किंतु प्रश्न यह पूछता है कि माँ का स्पष्ट मत, यानी अनुकरण द्वारा सीखना, किससे मेल खाता है; और वह व्यवहारवाद है।