कक्षा सात में हिंदी भाषा के आकलन की दृष्टि से सबसे कम प्रभावी है –

2021

कक्षा सात में हिंदी भाषा के आकलन की दृष्टि से सबसे कम प्रभावी है –

  1. A.

    प्रश्न-निर्माण

  2. B.

    अवलोकन

  3. C.

    बातचीत

  4. D.

    श्रुतलेख

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Correct answer: D

भाषा-आकलन का मूल उद्देश्य विद्यार्थी की वास्तविक भाषा-प्रयोग क्षमता — सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने में सार्थक संप्रेषण — का मूल्यांकन करना है, न कि केवल किसी यांत्रिक कौशल की जाँच करना। NCF 2005 तथा भारतीय भाषाओं के शिक्षण पर NCERT का स्थिति-पत्र सतत, सहभागी एवं संप्रेषणात्मक आकलन-तकनीकों को यांत्रिक/रटंत तकनीकों से अधिक प्रभावी मानते हैं।

दिए गए विकल्पों में से जिन तकनीकों में विद्यार्थी को वास्तविक या वास्तविक-सदृश संदर्भ में भाषा का सक्रिय व सार्थक प्रयोग करना पड़ता है, वे संप्रेषणात्मक दृष्टि से अधिक प्रभावी हैं; इसके विपरीत जो तकनीक केवल यांत्रिक पुनरुत्पादन तक सीमित है, वह सबसे कम प्रभावी सिद्ध होती है।

  • प्रश्न-निर्माण — विद्यार्थी को स्वयं सार्थक, व्याकरणिक रूप से सही प्रश्न गढ़ने पड़ते हैं, जो सक्रिय भाषा-प्रयोग व संरचना-बोध दर्शाता है।

  • अवलोकन — वास्तविक कक्षा-परिवेश में भाषा-प्रयोग देखने से सुनने-बोलने की योग्यता के सतत, प्रामाणिक प्रमाण मिलते हैं।

  • बातचीत — सजीव, अर्थ-केंद्रित आदान-प्रदान के माध्यम से तात्कालिक सुनने-बोलने की क्षमता का आकलन संभव बनाती है।

  • श्रुतलेख — विद्यार्थी केवल बोले गए अंश को यथावत लिख देता है; यह मुख्यतः वर्तनी और श्रवण-लेखन शुद्धता जाँचता है, वास्तविक समझ या सार्थक भाषा-प्रयोग नहीं — इसीलिए यह सबसे कम प्रभावी है।

यह निष्कर्ष CTET की रचनावादी एवं संप्रेषण-केंद्रित आकलन-नीति से मेल खाता है, जो रटंत/यांत्रिक तकनीकों को हतोत्साहित करती है — अतः श्रुतलेख को सबसे कम प्रभावी मानना उचित है।

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