हिंदी भाषा का आकलन करने के संदर्भ में वे प्रश्न अपेक्षाकृत बेहतर होते हैं –

2021

हिंदी भाषा का आकलन करने के संदर्भ में वे प्रश्न अपेक्षाकृत बेहतर होते हैं –

  1. A.

    जो बच्चों की कल्पना, सृजनशीलता को बढ़ावा देते हैं।

  2. B.

    जो बच्चों को सुंदर लेखन के लिए प्रेरित करते हैं।

  3. C.

    जिनके उत्तर जटिल व दीर्घ होते हैं।

  4. D.

    जिनके उत्तर तयशुदा होते हैं।

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Correct answer: A

भाषा-आकलन का मूल सिद्धांत यह है कि एक अच्छा प्रश्न बालक की उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक क्षमताओं — जैसे कल्पनाशीलता, सृजनात्मक चिंतन व मौलिक अभिव्यक्ति — का परीक्षण करे, न कि केवल रटी हुई जानकारी अथवा किसी निश्चित/तयशुदा उत्तर की पुनरावृत्ति का। एनसीएफ 2005 एवं सतत व्यापक मूल्यांकन (CCE) के सिद्धांतों के अनुसार, खुले (open-ended) प्रश्न जो बालक को स्वतंत्र रूप से सोचने और अभिव्यक्त करने का अवसर देते हैं, भाषा-दक्षता के आकलन हेतु श्रेष्ठ माने जाते हैं।

दिए गए विकल्पों में से केवल वही प्रश्न बेहतर आकलन-उपकरण माना जाएगा जो बालक की कल्पना व सृजनशीलता को बढ़ावा देता है, क्योंकि ऐसा प्रश्न बालक को अपने विचार मौलिक ढंग से गढ़ने व व्यक्त करने के लिए प्रेरित करता है — यही भाषा-प्रयोग की वास्तविक व उच्च-स्तरीय समझ का सूचक है।

  • सुंदर लेखन (सुलेख) पर बल देने वाला प्रश्न केवल प्रस्तुतीकरण की गुणवत्ता आँकता है, भाषा-प्रयोग की समझ को नहीं।

  • उत्तर की जटिलता व दीर्घता को अनिवार्य मानने वाला प्रश्न बालक को अनावश्यक विस्तार व शब्दाडंबर की ओर प्रेरित करता है, दीर्घता स्वयं में गुणवत्ता की गारंटी नहीं देती।

  • तयशुदा (पूर्वनिर्धारित) उत्तर वाला प्रश्न बालक से एक ही निश्चित उत्तर की अपेक्षा करता है, जिससे रटंत को बढ़ावा मिलता है और मौलिक चिंतन के आकलन की गुंजाइश समाप्त हो जाती है।

अतः कल्पना व सृजनशीलता को बढ़ावा देने वाले प्रश्न ही हिंदी भाषा-आकलन के लिए अपेक्षाकृत बेहतर माने जाते हैं।

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