‘कर्तव्य और अधिकारों की समष्टि’ — गद्यांश के इस वाक्यांश में ‘समष्टि’ का क्या…
2026
‘कर्तव्य और अधिकारों की समष्टि’ — गद्यांश के इस वाक्यांश में ‘समष्टि’ का क्या अर्थ है?
Answer: C. सामंजस्य — अवधारणागद्यांश-आधारित शब्दार्थ प्रश्न में किसी शब्द का अर्थ दो कसौटियों से तय होता है — उसका कोशीय अर्थ, और उस वाक्य में उसकी भूमिका जिसमें वह आया है।…
- A.
प्रतिस्पर्धा
- B.
वृद्धि
- C.
सामंजस्य
- D.
पुष्टि
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Correct answer: C
अवधारणा
गद्यांश-आधारित शब्दार्थ प्रश्न में किसी शब्द का अर्थ दो कसौटियों से तय होता है — उसका कोशीय अर्थ, और उस वाक्य में उसकी भूमिका जिसमें वह आया है। ‘समष्टि’ संस्कृत मूल का शब्द है; इसका कोशीय अर्थ है समूह, समग्रता अथवा कुल योग — अनेक पृथक् इकाइयों को एक साथ लेकर बना हुआ पूर्ण रूप। इसका विलोम ‘व्यष्टि’ है, अर्थात् अकेली इकाई।
प्रयोग
गद्यांश का वाक्य है — ‘नागरिक के कर्तव्य और अधिकारों की समष्टि को नागरिकता कहा जाता है।’ आशय यह है कि नागरिक के समस्त कर्तव्य और समस्त अधिकार मिलकर जो एक पूर्ण रूप बनाते हैं, उसी को नागरिकता कहा जाता है। अतः यह शब्द यहाँ ‘अनेक बातों के मिलकर एक हो जाने’ का भाव दे रहा है — न होड़ का, न बढ़ोतरी का, न प्रमाण का।
दिए गए शब्दों में से चयन
दिए गए चार शब्दों में ‘समूह/समग्रता’ का ठीक-ठीक पर्याय कोई नहीं है। ‘भिन्न बातों के मिलकर एक इकाई बन जाने’ के भाव के सर्वाधिक निकट ‘सामंजस्य’ (मेल, संयोजन) पड़ता है, और मूल प्रश्नपत्र की आधिकारिक उत्तर-कुंजी में भी यही उत्तर दिया गया है। शेष तीन शब्द इस भाव से पूर्णतः असंगत हैं —
‘प्रतिस्पर्धा’ रखने पर अर्थ बनेगा ‘कर्तव्य और अधिकारों की होड़’, जबकि गद्यांश इन दोनों के टकराव की नहीं, इनके मिलकर नागरिकता बनाने की बात कर रहा है।
‘वृद्धि’ रखने पर अर्थ बनेगा ‘कर्तव्य और अधिकारों का बढ़ना’, जो मात्रा की बात है; गद्यांश मात्रा नहीं बता रहा, नागरिकता की परिभाषा दे रहा है।
‘पुष्टि’ रखने पर अर्थ बनेगा ‘कर्तव्य और अधिकारों का प्रमाणीकरण’, जबकि गद्यांश प्रमाण नहीं माँग रहा, परिभाषा दे रहा है।
अतः इस प्रश्न में अभीष्ट उत्तर है — सामंजस्य। परीक्षा-दृष्टि से यह भी स्मरण रखें कि ‘समष्टि’ का शुद्ध कोशीय अर्थ ‘समूह/समग्रता’ ही है; यहाँ ‘सामंजस्य’ को निकटतम उपलब्ध पर्याय के रूप में स्वीकार किया गया है।