भारतीय दृष्टि ने किस सिद्धांत की प्रतिष्ठा की?
2025
भारतीय दृष्टि ने किस सिद्धांत की प्रतिष्ठा की?
Answer: B. रस सिद्धांत — अवधारणागद्यांश-आधारित बोध में लेखक के सामान्य सिद्धांत को उसके आसपास उल्लिखित उदाहरणों, प्रभावों और विपरीत दृष्टिकोणों से अलग पहचानें। अपेक्षित सिद्धांत का…
- A.
करुणा सिद्धांत
- B.
रस सिद्धांत
- C.
कल्पना सिद्धांत
- D.
कुतूहल सिद्धांत
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Correct answer: B
अवधारणा
गद्यांश-आधारित बोध में लेखक के सामान्य सिद्धांत को उसके आसपास उल्लिखित उदाहरणों, प्रभावों और विपरीत दृष्टिकोणों से अलग पहचानें।
अपेक्षित सिद्धांत का मेल उस पक्ष से भी होना चाहिए जिसे लेखक प्राथमिकता देता है और उस निष्कर्ष से भी जिसे गद्यांश स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है।
अनुप्रयोग
गद्यांश काव्य को कल्पना द्वारा निरूपित संज्ञानात्मक पक्ष और प्रेम, करुणा, क्रोध, उत्साह तथा विस्मय जैसे भावों द्वारा निरूपित भावात्मक पक्ष में विभाजित करता है। इसके बाद वह बताता है कि भारतीय दृष्टिकोण ने भावात्मक पक्ष को प्रधानता दी और रस-सिद्धांत की स्थापना की।
अंतर
करुणा-सिद्धांत इस अवधारणा को उल्लिखित अनेक भावात्मक अवस्थाओं में से केवल एक अवस्था तक सीमित कर देता है।
रस-सिद्धांत वह व्यापक सौंदर्यशास्त्रीय रूपरेखा प्रदान करता है जिसके माध्यम से भावात्मक पक्ष को समझा जाता है।
कल्पना-सिद्धांत उस संज्ञानात्मक पक्ष से संबंधित है जिसे गद्यांश मुख्यतः पाश्चात्य समालोचना से जोड़ता है।
कुतूहल-सिद्धांत किसी असामान्य वस्तु को देखने से उत्पन्न हल्की रुचि को संदर्भित करता है, जिसका आगे पाश्चात्य प्रवृत्ति के परिणाम के रूप में वर्णन किया गया है।
पुनः जाँच
गद्यांश के स्पष्ट निष्कर्षात्मक वाक्य में प्रत्येक पद को प्रतिस्थापित करने पर केवल ‘रस-सिद्धांत’ ही अपरिवर्तित रहता है; अन्य विकल्प किसी उदाहरण, विपरीत संज्ञानात्मक पक्ष अथवा बाद में बताए गए परिणाम का नाम देते हैं।
अतः उत्तर रस-सिद्धांत है।