गद्यांश में दक्षिण भारत की उत्तर भारत से भिन्नता किस आधार पर दर्शायी गयी है?
2025
गद्यांश में दक्षिण भारत की उत्तर भारत से भिन्नता किस आधार पर दर्शायी गयी है?
Answer: B. दक्षिण में सशक्त केंद्रीय सत्ता का होना — संकल्पना: अपठित गद्यांश के तुलनात्मक प्रश्न में "भिन्नता का आधार" वह तत्व होता है जिसे लेखक स्वयं कारण-कड़ी के आरंभ में रखता है — अर्थात वह तथ्य जिससे लेखक…
- A.
दक्षिण में छोटे राज्यों का वर्चस्व
- B.
दक्षिण में सशक्त केंद्रीय सत्ता का होना
- C.
दक्षिण में पराक्रमी शासकों का अभाव
- D.
दक्षिण में विकेंद्रीकृत शासन का होना
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Correct answer: B
संकल्पना: अपठित गद्यांश के तुलनात्मक प्रश्न में "भिन्नता का आधार" वह तत्व होता है जिसे लेखक स्वयं कारण-कड़ी के आरंभ में रखता है — अर्थात वह तथ्य जिससे लेखक आगे के सभी परिणाम निकालता है, न कि प्रसंगवश आया कोई भी विवरण। ऐसे प्रश्न को हल करने का नियम यह है कि गद्यांश के कारण-सूचक शब्दों — "के परिणामस्वरूप", "इससे", "इसका सीधा फायदा" — का पीछा करते हुए उस मूल कारण तक पहुँचा जाए जिस पर शेष विवरण टिके हुए हैं।
अनुप्रयोग: इस गद्यांश की कारण-कड़ी इस क्रम में खुलती है —
गद्यांश उत्तर भारत की 13वीं–14वीं सदी की स्थिति की तुलना दक्षिण भारत की पहली सदी के बाद की स्थिति से करता है, अर्थात तुलना का बिंदु राजनीतिक-आर्थिक स्थिति है।
दक्षिण के विषय में कहा गया है कि कई शताब्दियों तक राजसत्ता अनेक पराक्रमी शासकों के हाथ में रही।
इसके तुरंत बाद लेखक कारण बताता है — "केंद्रीय सत्ता के मज़बूत होने के परिणामस्वरूप व्यापार और कृषि में उन्नति स्वाभाविक है"; यही वाक्य कारण-कड़ी का आरंभ है।
इसी कड़ी के उदाहरण आगे दिए गए हैं — करिकाल द्वारा कावेरी के जल को नियंत्रित कर सिंचाई-व्यवस्था करने से कृषि-उत्पादन बढ़ा, और श्रीलंका पर विजय के बाद पुहार बंदरगाह बनने से विदेश-व्यापार तथा मसाले का व्यापार फैला।
गद्यांश आगे 7वीं–8वीं शताब्दी में पल्लव शासकों द्वारा स्थापत्य को दिए गए प्रोत्साहन, चित्रकला के विकास तथा कांचीपुरम के बुनकरों को मिले सम्मान का उल्लेख भी करता है, किंतु कारण के रूप में गद्यांश जिसे स्पष्ट शब्दों में रखता है वह केवल केंद्रीय सत्ता का मज़बूत होना है; अतः भिन्नता का घोषित आधार है — दक्षिण में सशक्त केंद्रीय सत्ता का होना।
प्रति-परीक्षण: शेष विकल्पों को गद्यांश के शब्दों से मिलाकर देखिए —
"दक्षिण में छोटे राज्यों का वर्चस्व" — गद्यांश दक्षिण के लिए भूभाग के बिखराव की नहीं, सत्ता के सुदृढ़ होने की बात करता है।
"दक्षिण में पराक्रमी शासकों का अभाव" — गद्यांश में स्पष्ट शब्दों में "अनेक पराक्रमी शासकों" का उल्लेख है, उनके अभाव का नहीं।
"दक्षिण में विकेंद्रीकृत शासन का होना" — गद्यांश की पूरी कारण-कड़ी "केंद्रीय सत्ता के मज़बूत होने" पर टिकी है, अधिकारों के स्थानीय बँटवारे पर नहीं।
परिणाम: गद्यांश में दक्षिण भारत की उत्तर भारत से भिन्नता का आधार "दक्षिण में सशक्त केंद्रीय सत्ता का होना" बताया गया है, जिसके परिणामस्वरूप गद्यांश के अनुसार वहाँ व्यापार और कृषि की उन्नति स्वाभाविक रही, और यह स्थिति उत्तर भारत की तुलना में कई शताब्दी पहले बन गई।