वर्तनी की दृष्टि से किस समूह में सभी शब्द शुद्ध हैं?
2022
वर्तनी की दृष्टि से किस समूह में सभी शब्द शुद्ध हैं?
Answer: B. वृद्धि, योद्धा, सामर्थ्य — संकल्पना — किसी शब्द की वर्तनी तभी शुद्ध मानी जाती है जब उसका वर्ण-विन्यास मानक हिंदी रूप से पूरी तरह मेल खाता हो। परीक्षाओं में तीन प्रकार की अशुद्धियाँ…
- A.
आंसू, खंबा, निशंग
- B.
वृद्धि, योद्धा, सामर्थ्य
- C.
वयंग, ऊंचा, निमित्त
- D.
कनिष्ठ, उज्ज्यनी, दांत
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Correct answer: B
संकल्पना — किसी शब्द की वर्तनी तभी शुद्ध मानी जाती है जब उसका वर्ण-विन्यास मानक हिंदी रूप से पूरी तरह मेल खाता हो। परीक्षाओं में तीन प्रकार की अशुद्धियाँ बार-बार आती हैं: (1) स्वर पर टिकी नासिक्यता के लिए चंद्रबिंदु (ँ) के स्थान पर अनुस्वार (ं) लिख देना, (2) मिलती-जुलती ध्वनियों वाले व्यंजनों (ब/भ, श/ष) को आपस में बदल देना, तथा (3) तत्सम शब्दों के संयुक्ताक्षर, वर्ण-क्रम या मात्रा को छोड़ या बदल देना। 'समूह' वाले प्रश्न में समूह तभी शुद्ध होता है जब उसका प्रत्येक शब्द शुद्ध हो — एक भी अशुद्ध शब्द पूरे समूह को अशुद्ध कर देता है।
प्रयोग — अब चारों समूहों के प्रत्येक शब्द को मानक रूप के सामने रखकर देखिए:
शब्द-समूह | अशुद्ध शब्द | मानक (शुद्ध) रूप | अशुद्धि का आधार |
|---|---|---|---|
आंसू, खंबा, निशंग | आंसू; खंबा; निशंग | आँसू; खंभा; निषंग | अनुनासिक के स्थान पर अनुस्वार; महाप्राण 'भ' के स्थान पर अल्पप्राण 'ब'; मूर्धन्य 'ष' के स्थान पर तालव्य 'श' |
वृद्धि, योद्धा, सामर्थ्य | कोई नहीं | वृद्धि; योद्धा; सामर्थ्य | तीनों शब्द ज्यों के त्यों मानक रूप में हैं |
वयंग, ऊंचा, निमित्त | वयंग; ऊंचा | व्यंग्य; ऊँचा | संयुक्ताक्षर 'व्य' तथा अंत्य 'य' का लोप; अनुनासिक के स्थान पर अनुस्वार ('निमित्त' स्वयं शुद्ध है) |
कनिष्ठ, उज्ज्यनी, दांत | उज्ज्यनी; दांत | उज्जयिनी; दाँत | नगर-नाम में वर्ण-क्रम तथा मात्रा की अशुद्धि; अनुनासिक के स्थान पर अनुस्वार ('कनिष्ठ' स्वयं शुद्ध है) |
जाँच — जो समूह शुद्ध निकला है उसके तीनों शब्दों को अलग से परख लीजिए:
'वृद्धि' — संस्कृत 'वृद्धि' का तत्सम रूप; 'ऋ' की मात्रा तथा 'द्ध' संयुक्ताक्षर दोनों यथावत हैं।
'योद्धा' — 'युध्' धातु से बना तत्सम शब्द; इसमें 'द्ध' संयुक्ताक्षर (हलंत 'द्' + 'ध') सही लिखा गया है।
'सामर्थ्य' — 'सामर्थ्य' में 'र' रेफ के रूप में तथा 'थ्य' नीचे लिखा गया है, जो मानक विन्यास है।
इनमें न कोई अनुनासिक-अनुस्वार की अदला-बदली है, न व्यंजन-भेद की चूक, न कोई मात्रा छूटी है।
निष्कर्ष — वर्तनी की दृष्टि से जिस समूह के सभी शब्द शुद्ध हैं वह है — 'वृद्धि, योद्धा, सामर्थ्य'।
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