'वह आम को खा रहा है।' — इस वाक्य में अशुद्धि किस प्रकार की है?

2022

'वह आम को खा रहा है।' — इस वाक्य में अशुद्धि किस प्रकार की है?

Answer: C. कारक संबंधीसंकल्पना — हिंदी में वाक्य की अशुद्धि इस आधार पर वर्गीकृत होती है कि व्याकरण की कौन-सी व्यवस्था टूट रही है: लिंग (कर्ता/विशेषण और क्रिया के लिंग का मेल), वचन…

  1. A.

    लिंग संबंधी

  2. B.

    क्रिया संबंधी

  3. C.

    कारक संबंधी

  4. D.

    वचन संबंधी

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Correct answer: C

संकल्पना — हिंदी में वाक्य की अशुद्धि इस आधार पर वर्गीकृत होती है कि व्याकरण की कौन-सी व्यवस्था टूट रही है: लिंग (कर्ता/विशेषण और क्रिया के लिंग का मेल), वचन (एकवचन-बहुवचन का मेल), क्रिया (काल, पक्ष और पुरुष के अनुसार क्रिया का गठन), अथवा कारक (परसर्ग — ने, को, से, में — जो संज्ञा की भूमिका दर्शाता है)। परसर्ग की उपयुक्तता उस संज्ञा से तय होती है जिससे वह जुड़ता है: मानक शिक्षण-व्याकरण में कर्म कारक का 'को' सजीव अथवा किसी संदर्भ से विशेष रूप से निर्दिष्ट कर्म के साथ आता है (जैसे 'माँ ने बच्चे को बुलाया'), जबकि बिना किसी निर्देशक संदर्भ वाला सामान्य निर्जीव कर्म बिना परसर्ग के ही रहता है।

प्रयोग — दिए गए वाक्य 'वह आम को खा रहा है।' में कर्ता 'वह' और क्रिया 'खा रहा है' दोनों पुल्लिंग तथा दोनों एकवचन हैं, और सहायक क्रिया सहित क्रिया-रूप वर्तमान काल की अपूर्ण अवस्था के लिए सही बना है। शेष रह जाता है 'आम' पर लगा परसर्ग 'को'। यहाँ 'आम' के साथ न कोई संकेतवाचक शब्द है, न पूर्व-संदर्भ, न सजीवीकरण — अर्थात् वह एक सामान्य निर्जीव कर्म है, और मानक शिक्षण-व्याकरण ऐसे कर्म पर कर्म-कारक चिह्न नहीं लगाता। अतः शुद्ध वाक्य होगा — 'वह आम खा रहा है।'

प्रति-परीक्षण — शेष तीनों व्यवस्थाएँ इस वाक्य में सुरक्षित हैं:

  • लिंग — 'वह' और 'रहा है' दोनों पुल्लिंग हैं, इसलिए लिंग की व्यवस्था अखंडित है।

  • वचन — 'वह' और 'रहा है' दोनों एकवचन हैं, इसलिए वचन की व्यवस्था अखंडित है।

  • क्रिया — 'खा रहा है' तृतीय पुरुष एकवचन कर्ता के लिए वर्तमान अपूर्ण का शुद्ध रूप है, इसलिए क्रिया की व्यवस्था अखंडित है।

रजिस्टर संबंधी टिप्पणी — आधुनिक वर्णनात्मक भाषा-विज्ञान में 'को' किसी निश्चित या विशेष रूप से निर्दिष्ट निर्जीव कर्म के साथ भी आ सकता है (जैसे 'उसने उस आम को खा लिया'), और इस दृष्टि से वाक्य अपने आप में असंभव नहीं है। परन्तु परीक्षा में मान्य मानक/शिक्षण-व्याकरण बिना किसी निर्देशक संदर्भ के इस 'को' को अनावश्यक ही मानता है, और प्रश्न स्वयं यह मानकर चलता है कि वाक्य में अशुद्धि है तथा केवल उसका प्रकार पूछता है।

परिणाम — लिंग, वचन और क्रिया — तीनों व्यवस्थाएँ अखंडित हैं और एकमात्र विवादित तत्त्व परसर्ग है, अतः दिए गए विकल्पों में यह अशुद्धि कारक संबंधी ही ठहरती है।

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