निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प…

2021

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

ज़िंदगी में धूप-छाँव के सिद्धांत को मानने वाले फूलों के साथ काँटों की मौजूदगी की शिकायत नहीं करते । यह संभव नहीं कि बिना अड़चन और चुनौतियों के दैनिक कार्य या विशेष कार्य संपन्न होते चले जाएँ । जो इन अप्रिय, अप्रत्याशित घटनाओं से जूझने के लिए स्वयं को तैयार नहीं रखेंगे उनके लिए जीवन अभिशाप बन जाएगा । वे पग-पग पर चिंतित और दुखी रहेंगे और संघर्षों के उपरांत मिलने वाले आनंद से वे वंचित रह जाएँगे । मुश्किल परिस्थितियों में संयत, धीर व्यक्ति भी विचलित हो सकता है । सन्मार्ग पर चलने वाले की राह में कम बाधाएँ नहीं आतीं ।

हम जीवित हैं तो कठिनाइयाँ, चुनौतियाँ आएँगी ही । किंतु स्मरण रहे, कठिनाइयों और बाधाओं का प्रयोजन हमें तोड़ना-गिराना नहीं बल्कि ये हमें सुदृढ़ करने के माध्यम हैं । बाधाओं का सकारात्मक पक्ष यह है कि कठिनाइयों से निपटने में उन कौशलों और जानकारियों का प्रयोग आवश्यक होता है जो सामान्य अवस्था में सुषुप्त, निष्क्रिय पड़ी रहती हैं और दुष्कर परिस्थितियों से जूझने पर ही सक्रिय स्थिति में आती हैं । सुधी जन को यह पता होता है । अमेरिकी रंगकर्मी और पत्रकार विल रोजर्स ने कहा, 'कठिनाई से उबरने का मार्ग इसी के बीच मिल जाता है ।' समस्याओं से नहीं जूझेंगे तो ये विशिष्ट कौशल स्थायी रूप से क्षीण हो जाएँगे तथा व्यक्ति समग्र तौर पर जीने में अक्षम हो जाएगा ।

हो सकता है कोई व्यक्ति एक तख्त पर सोते हुए कष्ट महसूस करे जबकि दूसरा व्यक्ति उसी तख्त को आरामदायक महसूस करे । मगर यह असमानता आरंभिक स्तर की है । आंतरिक या मूलगत भाव से एक व्यक्ति की दूसरे से कोई भी भिन्नता नहीं है ।

जिसका मन जितने विस्तृत क्षेत्र के विषयों की ओर भागता है उसके लिए मन को एकाग्र करना उतना ही मुश्किल होता है । लेकिन एक व्यक्ति के मन को आकर्षित करने वाली वस्तुएँ किसी अन्य मनुष्य को मानसिक स्तर पर प्रभावित कर सकती हैं और ऐसे ही किसी अन्य व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा में मददगार भी साबित हो सकती हैं । इसी बिंदु पर यह बात समझने की है कि दूसरे के प्रति अपनी पवित्र या शुभ भावना के द्वारा हम अनेक व्यक्तियों की मानस तरंगों में परिवर्तन कर सकते हैं ।

लेखक का कथन है कि आरंभिक स्तर की असमानता के होते हुए भी भीतरी भाव से –

Answer: C. एक – दूसरे में कोई भिन्नता नहीं होती।अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में सही विकल्प वही होता है जिसका कथन गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखा हो या उसी आशय से व्यक्त किया गया हो; अन्य विकल्प…

  1. A.

    सब लोग एक-सा सोचते हैं।

  2. B.

    मनुष्य विषयों की ओर भागता है।

  3. C.

    एक – दूसरे में कोई भिन्नता नहीं होती।

  4. D.

    हमें कौशलों और जानकारियों का उपयोग करना होता है।

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Correct answer: C

अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में सही विकल्प वही होता है जिसका कथन गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखा हो या उसी आशय से व्यक्त किया गया हो; अन्य विकल्प भले ही गद्यांश के किसी अंश से मिलते-जुलते शब्द रखते हों, पर वे प्रश्न में पूछे गए विशिष्ट कथन से संबंधित नहीं होते।

अनुप्रयोग: गद्यांश के तीसरे अनुच्छेद में तख्त पर सोने के उदाहरण के तुरंत बाद कहा गया है — 'मगर यह असमानता आरंभिक स्तर की है। आंतरिक या मूलगत भाव से एक व्यक्ति की दूसरे से कोई भी भिन्नता नहीं है।' प्रश्न में पूछा गया है कि आरंभिक स्तर की असमानता के होते हुए भी भीतरी भाव से क्या स्थिति है — यह पंक्ति सीधे बताती है कि भीतरी भाव से एक-दूसरे में कोई भिन्नता नहीं होती, जो कथन 'एक-दूसरे में कोई भिन्नता नहीं होती।' से मेल खाता है।

तुलना: शेष तीन विकल्प गद्यांश के अन्य भागों से जुड़े हैं:

  • 'मनुष्य विषयों की ओर भागता है' — चौथे अनुच्छेद में मन की एकाग्रता के प्रसंग से है।

  • 'हमें कौशलों और जानकारियों का उपयोग करना होता है' — दूसरे अनुच्छेद में कठिनाइयों से निपटने के प्रसंग से है।

  • 'सब लोग एक-सा सोचते हैं' — गद्यांश में इस रूप में कहीं नहीं कहा गया है।

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