हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास किसे माना जाता है ?

2016

हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास किसे माना जाता है ?

Answer: D. परीक्षा गुरु"हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास" निर्धारित करने के लिए मुख्यतः दो कसौटियाँ अपनाई जाती हैं — रचना मूल रूप से हिन्दी में लिखी गई हो (किसी अन्य भाषा से अनूदित न…

  1. A.

    नूतन ब्रह्मचारी

  2. B.

    तितली

  3. C.

    त्याग-पत्र

  4. D.

    परीक्षा गुरु

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Correct answer: D

"हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास" निर्धारित करने के लिए मुख्यतः दो कसौटियाँ अपनाई जाती हैं — रचना मूल रूप से हिन्दी में लिखी गई हो (किसी अन्य भाषा से अनूदित न हो), और वह उपन्यास-विधा के आवश्यक तत्वों — सुसंगत कथानक, चरित्र-चित्रण तथा समकालीन सामाजिक जीवन के यथार्थवादी चित्रण — सहित रचित सभी कृतियों में सबसे पहले प्रकाशित हुई हो।

इस कसौटी पर लाला श्रीनिवास दास द्वारा रचित "परीक्षा गुरु" (1882 ई.) हिन्दी की वह पहली कृति मानी जाती है जिसमें ये लक्षण एक साथ मिलते हैं — इसमें दिल्ली के व्यापारी समाज के आर्थिक व नैतिक जीवन का यथार्थवादी चित्रण है, और यह मूल रूप से हिन्दी में ही रची गई थी। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने भी इसे "अंगरेजी ढंग का मौलिक उपन्यास" कहकर इसी स्थान पर रखा है। इसी आधार पर इसे हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास स्वीकार किया जाता है।

  • "नूतन ब्रह्मचारी" बालकृष्ण भट्ट की रचना मानी जाती है, जो प्रकाशन-काल की दृष्टि से "परीक्षा गुरु" (1882 ई.) के बाद की कृति है, अतः यह प्रथम होने की कसौटी पूरी नहीं करती।

  • "तितली" जयशंकर प्रसाद की रचना है, जो 1934 ई. में प्रकाशित हुई — अर्थात यह कालक्रम में 1882 ई. से काफी बाद की कृति है।

  • "त्याग-पत्र" जैनेन्द्र कुमार का मनोवैज्ञानिक उपन्यास है, जो 1937 ई. में प्रकाशित हुआ — यह भी समय की दृष्टि से बहुत बाद की रचना है।

अतः प्रकाशन-काल की कसौटी पर "परीक्षा गुरु" ही दिए गए विकल्पों में हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास सिद्ध होता है, क्योंकि शेष तीनों रचनाएँ इसके बाद प्रकाशित हुई थीं।

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