भारत की ‘शिक्षा नीति में भाषा’ (त्रिभाषा सूत्र) किसे समुन्नत करने के लिए कहती…
2024
भारत की ‘शिक्षा नीति में भाषा’ (त्रिभाषा सूत्र) किसे समुन्नत करने के लिए कहती है?
- A.
बहुभाषा शिक्षा
- B.
एक भाषिक शिक्षा
- C.
हिन्दी पर मुख्य बल देते हुए द्विभाषिक शिक्षा
- D.
मातृभाषा आधारित बहुभाषावाद
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Correct answer: D
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के त्रिभाषा सूत्र का मूल सिद्धांत यह है कि बच्चे की मातृभाषा या घर की भाषा में दी गई प्रारंभिक शिक्षा संज्ञानात्मक स्पष्टता, अवधारणात्मक समझ और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए सर्वाधिक प्रभावी माध्यम होती है। इसी सिद्धांत के आधार पर नीति मातृभाषा/स्थानीय भाषा को यथासंभव शिक्षा का माध्यम बनाकर बहुभाषिकता को बढ़ावा देने की बात करती है, जबकि शेष भाषाओं का चयन राज्यों, क्षेत्रों तथा विद्यार्थियों की आवश्यकता पर लचीला छोड़ा गया है (केवल यह शर्त है कि उनमें से कम-से-कम दो भाषाएँ भारत की मूल भाषाएँ हों)।
इस सिद्धांत को त्रिभाषा सूत्र पर लागू करने पर स्पष्ट होता है कि विद्यालयी शिक्षा में, विशेषकर आरंभिक कक्षाओं में, मातृभाषा या स्थानीय भाषा को शिक्षण के माध्यम के रूप में यथासंभव वरीयता दी जाती है, ताकि बच्चा सहजता से सीख सके; साथ ही राज्य/क्षेत्र की आवश्यकता के अनुसार दो अन्य भाषाएँ जोड़कर बहुभाषिकता को क्रमिक रूप से विकसित किया जाता है, बिना किसी एक निश्चित त्रि-भाषा संयोजन को सभी पर अनिवार्य किए।
बहुभाषा शिक्षा — यह पद बहुत सामान्य है; यह न तो मातृभाषा को माध्यम बनाए जाने की बात करता है और न ही भाषाओं के चयन में किसी लचीली प्रक्रिया की, जबकि नीति दस्तावेज़ में मातृभाषा-केंद्रित बहुभाषिकता का स्पष्ट उल्लेख है।
एक भाषिक शिक्षा — यह सीधे तौर पर उस विचार के विपरीत है जो त्रिभाषा सूत्र के नाम में ही निहित है; सूत्र स्वयं तीन भाषाओं के समावेश की बात करता है, अतः किसी एक भाषा तक सीमित शिक्षा की धारणा यहाँ गलत आधार है।
हिन्दी पर मुख्य बल देते हुए द्विभाषिक शिक्षा — यह विकल्प मान लेता है कि नीति केवल दो भाषाओं तक सीमित रहकर हिन्दी को विशेष प्राथमिकता देती है; जबकि त्रिभाषा सूत्र किसी एक भारतीय भाषा को असमान वरीयता दिए बिना तीन भाषाओं के संतुलित समावेशन पर बल देता है।
अतः शिक्षा नीति में भाषा संबंधी प्रावधान का सटीक वर्णन ‘मातृभाषा आधारित बहुभाषावाद’ ही करता है — जिसमें मातृभाषा/स्थानीय भाषा को यथासंभव शिक्षा का माध्यम बनाकर बहुभाषिकता को लचीले किंतु संतुलित ढंग से विकसित किया जाता है।