भाषा के बारे में चिन्तन करने और बात करने की योग्यता को क्या कहेंगे ?
2023
भाषा के बारे में चिन्तन करने और बात करने की योग्यता को क्या कहेंगे ?
- A.
अधिभाषिक (विचार-विमर्श) योग्यता
- B.
ध्वन्यात्मक जागरूकता
- C.
निपुण वक्ता
- D.
उद्गामी साक्षरता
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Correct answer: A
अवधारणा: अधिभाषिक (विचार-विमर्श) योग्यता वह संज्ञानात्मक क्षमता है, जिसके द्वारा भाषा का केवल संप्रेषण के लिए उपयोग करने के बजाय स्वयं भाषा को विचार की वस्तु माना जाता है तथा उसकी ध्वनियों, शब्दों, व्याकरण और अर्थों पर सचेत रूप से ध्यान दिया जाता है, उनका विश्लेषण किया जाता है और उनके बारे में चर्चा की जाती है। इसका विकास सामान्यतः मध्य बाल्यावस्था में होता है, जब बच्चे अस्पष्टता, शब्द-क्रीड़ा और व्याकरणिक नियमों को स्पष्ट रूप से पहचानने लगते हैं।
अनुप्रयोग: प्रश्न में ठीक इसी क्षमता का वर्णन किया गया है—स्वयं भाषा के बारे में सोचने और चर्चा करने की क्षमता। यही अधिभाषिक (विचार-विमर्श) योग्यता का परिभाषात्मक मूल है; अतः निर्धारित विकल्प अधिभाषिक (विचार-विमर्श) योग्यता इस संकल्पना को सटीक रूप से व्यक्त करता है।
ध्वन्यात्मक जागरूकता अपेक्षाकृत सीमित श्रवण-संबंधी कौशल है, जिसमें बोले गए शब्दों के शब्दांश, तुक और स्वनिम जैसी ध्वनि-इकाइयों को पहचानना तथा उनमें परिवर्तन करना शामिल है; यह समग्र रूप से भाषा पर चिंतन और चर्चा करने की व्यापक क्षमता नहीं है।
निपुण वक्ता की पहचान संप्रेषण में भाषा के धाराप्रवाह और शुद्ध प्रयोग से होती है। यह भाषा-निष्पादन का माप है, न कि भाषा की संरचना पर चिंतन या विचार-विमर्श करने की क्षमता।
उद्गामी साक्षरता में औपचारिक पठन और लेखन से पहले विकसित होने वाले मुद्रित सामग्री से संबंधित आरंभिक व्यवहार और समझ शामिल हैं, जैसे पुस्तकों को संभालना तथा प्रतीकों को ध्वनियों से जोड़ना। यह भाषा पर सचेत चिंतन से भिन्न विकासात्मक क्षेत्र है।
निष्कर्ष: क्योंकि प्रश्नांश का मूल मानदंड—स्वयं भाषा के बारे में सोचना और चर्चा करना—केवल अधिभाषिक (विचार-विमर्श) योग्यता की परिभाषा से मेल खाता है, इसलिए दिए गए विकल्पों में यही सही वर्गीकरण है।