'निगमन प्रणाली' का प्रयोग किस प्रकार के शिक्षण में होता है?
2021
'निगमन प्रणाली' का प्रयोग किस प्रकार के शिक्षण में होता है?
- A.
व्याकरण शिक्षण प्रणाली
- B.
खेल शिक्षण प्रणाली
- C.
कम्प्यूटर शिक्षण प्रणाली
- D.
गद्य लेखन शिक्षण प्रणाली
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Correct answer: A
भाषा-शिक्षण विधियों को तर्क की दिशा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। निगमन विधि (Deductive Method) में सबसे पहले सामान्य नियम बताया जाता है और फिर उसे उदाहरणों द्वारा स्पष्ट व अभ्यास कराया जाता है (नियम → उदाहरण), जबकि आगमन विधि (Inductive Method) में इसके विपरीत पहले उदाहरण दिए जाते हैं और फिर उनसे नियम निकाला जाता है (उदाहरण → नियम)। व्याकरण-शिक्षण में, जहाँ किसी नियम (जैसे वर्तनी, वाक्य-रचना या रूप-परिवर्तन के नियम) का बोध कराना मुख्य लक्ष्य होता है, निगमन विधि का प्रयोग सर्वाधिक स्थापित रूप से होता है।
प्रश्न में पूछा गया है कि निगमन प्रणाली किस प्रकार के शिक्षण में प्रयुक्त होती है। चूँकि व्याकरण-शिक्षण में अध्यापक पहले व्याकरणिक नियम प्रस्तुत करता है और फिर छात्रों को उदाहरणों के माध्यम से उस नियम का प्रयोग करना सिखाता है, यह निगमन विधि की मानक परिभाषा से पूर्णतः मेल खाता है। अतः 'व्याकरण शिक्षण प्रणाली' सही उत्तर है।
खेल शिक्षण प्रणाली भाषा को क्रियाकलाप व अनुभव के माध्यम से सिखाती है; यह पहले नियम बताने के बजाय खेल के दौरान स्वाभाविक भाषा-प्रयोग पर आधारित होती है, इसलिए यह नियम-प्रधान निगमन विधि की पहचान से मेल नहीं खाती।
कम्प्यूटर शिक्षण प्रणाली शिक्षण-सामग्री प्रस्तुत करने का एक माध्यम/तकनीक है, जिसका प्रयोग आगमन और निगमन — दोनों प्रकार की विधियों में किया जा सकता है; यह स्वयं किसी विशेष तर्क-दिशा (नियम→उदाहरण अथवा उदाहरण→नियम) को परिभाषित नहीं करती।
गद्य लेखन शिक्षण प्रणाली रचना व लेखन-कौशल के अभ्यास पर केंद्रित होती है, जिसमें अभिव्यक्ति व सृजनात्मकता पर बल दिया जाता है, न कि किसी नियम को पहले प्रस्तुत करने पर।
अतः निगमन प्रणाली का प्रयोग मुख्यतः व्याकरण शिक्षण में होता है।