चेतन की प्रथम भाषा भोजपुरी है । वह तमिलनाडु गया, अब वह भोजपुरी नहीं बोलता है…
2023
चेतन की प्रथम भाषा भोजपुरी है । वह तमिलनाडु गया, अब वह भोजपुरी नहीं बोलता है और अपने साथियों से केवल अंग्रेज़ी में ही बोलता है । जब नई द्वितीय भाषा प्रथम भाषा का स्थान लेती है, तो यह स्थिति किस बात की द्योतक है ?
- A.
कोड मिक्सिंग
- B.
ऋणात्मक द्विभाषावाद
- C.
कोड स्विचिंग
- D.
द्विभाषावाद
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Correct answer: B
द्विभाषिकता एक सामान्य शब्द है, जिसमें व्यक्ति दो भाषाओं का प्रयोग करता है। परन्तु जब द्वितीय भाषा के प्रभाव में प्रथम भाषा (मातृभाषा) का प्रयोग करना बंद हो जाता है और द्वितीय भाषा उसका स्थान ले लेती है, तो इस परिघटना को भाषाविज्ञान में ऋणात्मक अथवा अपघटनकारी द्विभाषावाद कहा जाता है। यह योगात्मक द्विभाषावाद से भिन्न है, जिसमें द्वितीय भाषा प्रथम भाषा के साथ-साथ जुड़ती है, उसके प्रयोग को समाप्त नहीं करती।
प्रश्न में चेतन की प्रथम भाषा भोजपुरी थी। तमिलनाडु जाने के बाद उसने भोजपुरी बोलना पूरी तरह छोड़ दिया और अब साथियों से केवल अंग्रेज़ी (द्वितीय भाषा) में ही बात करता है। यहाँ द्वितीय भाषा ने प्रथम भाषा के प्रयोग का पूर्ण रूप से स्थान ले लिया — यह ठीक ऋणात्मक द्विभाषावाद की परिभाषा से मेल खाता है।
कोड मिक्सिंग: एक ही बातचीत में दो भाषाओं के शब्द/वाक्यांश साथ-साथ मिलाकर बोलना — चेतन की वर्तमान बातचीत पूरी तरह अंग्रेज़ी में है, उसमें भोजपुरी के शब्द गुंथे हुए नहीं हैं।
कोड स्विचिंग: परिस्थिति के अनुसार दो भाषाओं के बीच बारी-बारी बदलना, जबकि दोनों भाषाएँ बोलने की क्षमता बनी रहती है — चेतन की भोजपुरी बोलने की क्षमता अब वर्णित ही नहीं है।
सामान्य द्विभाषावाद: दो भाषाओं का नियमित प्रयोग, चाहे दोनों भाषाएँ प्रयोग में बनी रहें या कोई एक धीरे-धीरे प्रयोग से बाहर हो जाए — यह शब्द अपने आप में किसी भाषा के प्रयोग के बंद हो जाने की प्रक्रिया को इंगित नहीं करता, जबकि चेतन की भोजपुरी पूरी तरह प्रयोग से बाहर हो चुकी है।
अतः चेतन की स्थिति — द्वितीय भाषा द्वारा प्रथम भाषा के प्रयोग का पूर्ण प्रतिस्थापन — ऋणात्मक द्विभाषावाद को दर्शाती है।