रात्रि की भीषणता को कौन ललकारती रहती थी ?

2026

रात्रि की भीषणता को कौन ललकारती रहती थी ?

Answer: D. पहलवान की ढोलकअवधारणा: गद्यांश-आधारित ‘कौन/क्या’ प्रश्न का उत्तर पाठक के सामान्य ज्ञान या अनुमान से नहीं निकलता, बल्कि गद्यांश के उसी वाक्य से निकलता है जिसमें प्रश्न वाली…

  1. A.

    गाँव के लोग

  2. B.

    पुलिस प्रशासन

  3. C.

    रात्रि का प्रहरी

  4. D.

    पहलवान की ढोलक

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Correct answer: D

अवधारणा: गद्यांश-आधारित ‘कौन/क्या’ प्रश्न का उत्तर पाठक के सामान्य ज्ञान या अनुमान से नहीं निकलता, बल्कि गद्यांश के उसी वाक्य से निकलता है जिसमें प्रश्न वाली क्रिया प्रयुक्त हुई हो। विधि तीन चरणों की है:

  1. प्रश्न में आई क्रिया को पहचानो।

  2. गद्यांश में वही क्रिया जिस वाक्य में आई है, उस वाक्य को ढूँढ़ो।

  3. उस वाक्य में उस क्रिया का कर्ता कौन है — यह देखो; कर्ता ही उत्तर होता है।

प्रयोग: इसी विधि को इस प्रश्न पर लागू करते हैं —

  1. क्रिया — प्रश्न की क्रिया है ‘ललकारती रहती थी’।

  2. वाक्य — गद्यांश का पहला ही वाक्य है: ‘रात्रि अपनी भीषणताओं के साथ चलती रहती और उसकी सारी भीषणता को, ताल ठोककर, ललकारती रहती थी—सिर्फ़ पहलवान की ढोलक!’

  3. कर्ता — इस वाक्य में ‘ललकारती रहती थी’ क्रिया का कर्ता है ‘पहलवान की ढोलक’, और ‘सिर्फ़’ शब्द उसे एकमात्र कर्ता बना देता है।

अतः रात्रि की भीषणता को ललकारने वाली है — पहलवान की ढोलक।

अन्य विकल्पों से तुलना:

विकल्प

गद्यांश में उसकी स्थिति

गाँव के लोग

लुट्टन की विधवा सास को तरह-तरह की तकलीफ़ देने वाले लोग; ललकारने की क्रिया इनसे नहीं जुड़ी।

पुलिस प्रशासन

गद्यांश गाँव की रात्रि और ढोलक की ध्वनि पर केंद्रित है; किसी शासकीय व्यवस्था का वर्णन इसमें आया ही नहीं।

रात्रि का प्रहरी

रात्रि स्वयं ‘अपनी भीषणताओं के साथ’ चलती हुई वर्णित है और वही वह पक्ष है जिसे ललकारा जा रहा है; रात में पहरा देने वाले किसी व्यक्ति का उल्लेख गद्यांश में नहीं आया।

पहलवान की ढोलक

संध्या से प्रातःकाल तक एक ही गति से बजने वाली वह ध्वनि, जो ताल ठोककर रात्रि की सारी भीषणता को ललकारती रहती है।

पुष्टि: गद्यांश आगे इसी ध्वनि के विषय में कहता है — ‘यही आवाज़ मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी’, अर्थात् रात की भीषणता के सामने डटकर खड़ी होने वाली एकमात्र शक्ति ढोलक की आवाज़ ही है। यह अंश फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ से लिया गया है।

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