संवदिया का नाम क्या था?
2026
संवदिया का नाम क्या था?
Answer: C. हरगोबिन — अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित "नाम बताइए" प्रकार के प्रश्न का उत्तर गद्यांश के भीतर ही मिलता है, बाहरी जानकारी से नहीं। विधि यह है — पहले प्रश्न में आए…
- A.
डाक बाबू
- B.
सेवाराम
- C.
हरगोबिन
- D.
चंद्ररेज
Attempted by 32 students.
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Correct answer: C
अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित "नाम बताइए" प्रकार के प्रश्न का उत्तर गद्यांश के भीतर ही मिलता है, बाहरी जानकारी से नहीं। विधि यह है — पहले प्रश्न में आए भूमिका-शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए, फिर गद्यांश में उस पात्र को पहचानिए जिसका कार्य-व्यवहार उसी भूमिका का हो। "संवदिया" का अर्थ है — वह व्यक्ति जो एक स्थान से दूसरे स्थान तक हाथों-हाथ संवाद अर्थात् संदेश पहुँचाता है।
प्रयोग: इस गद्यांश में भूमिका-मिलान इस क्रम से कीजिए —
गद्यांश का कथा-केंद्र वह पात्र है जिसे अचरज होता है कि आज भी किसी को संवदिया की ज़रूरत पड़ सकती है; अपने ही पेशे पर हुआ यह अचरज बताता है कि वह स्वयं संदेश ले जाने वाला है।
"फिर उसकी बुलाहट क्यों हुई?" — बुलावा उसी को भेजा जाता है जिसे संदेश पहुँचाना होता है; अतः यही पात्र संवदिया की भूमिका में है।
"सदा की भाँति उसने वातावरण को सूँघकर संवाद का अंदाज़ लगाया" — "सदा की भाँति" शब्द बताते हैं कि संदेश भाँपना उसका नित्य का काम है, कोई एक बार की घटना नहीं।
गद्यांश में ये तीनों क्रियाएँ जिस नाम से जुड़ी हैं, वह है — हरगोबिन। अतः संवदिया का नाम हरगोबिन है।
मिलान: गद्यांश में आए शेष उल्लेख इस भूमिका पर खरे नहीं उतरते — "डाकघर" एक संस्था है, कोई व्यक्ति नहीं, और "बड़ी बहुरिया" संदेश भिजवाने वाली हैं, उसे ले जाने वाली नहीं। इसलिए संदेश ले जाने वाले पात्र का नाम हरगोबिन ही ठहरता है।