दिए गए गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक का चयन कीजिए।

2026

दिए गए गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक का चयन कीजिए।

Answer: D. पहलवान की ढोलकसंकल्पना किसी गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक वह होता है जो पूरे अंश की केंद्रीय और बार-बार लौटने वाली वस्तु या भाव को एक साथ समेट ले। केवल पृष्ठभूमि का विवरण, कोई…

  1. A.

    रात्रि की नीरवता

  2. B.

    प्रात:काल का समय

  3. C.

    पहलवान की लाठी

  4. D.

    पहलवान की ढोलक

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Correct answer: D

संकल्पना

किसी गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक वह होता है जो पूरे अंश की केंद्रीय और बार-बार लौटने वाली वस्तु या भाव को एक साथ समेट ले।

केवल पृष्ठभूमि का विवरण, कोई समय-सूचक शब्द या प्रसंगवश आई हुई वस्तु शीर्षक का आधार नहीं बनती; शीर्षक वही होता है जिसके चारों ओर शेष सारे विवरण घूमते हैं।

प्रयोग (इस गद्यांश पर)

  1. अंश की पहली ही पंक्ति में रात्रि की सारी भीषणता को 'ताल ठोककर ललकारने' वाली एक ही वस्तु बताई गई है — पहलवान की ढोलक।

  2. इसके बाद बताया गया है कि यह ढोलक 'संध्या से लेकर प्रातःकाल तक' एक ही गति से बजती रहती है, उसकी थाप के अर्थ तक खोले गए हैं — 'आ जा भिड़ जा' और 'उठाकर पटक दे' — और यही आवाज़ 'मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति' भरती रहती है।

  3. अंश का उत्तरार्ध लुट्टन सिंह पहलवान का जीवन-परिचय देता है — वही इस ढोलक को बजाने वाला पात्र है; इस प्रकार अंश का आरंभिक और सबसे मुखर चित्र इसी ध्वनि का है और शेष विवरण उसी बजाने वाले पात्र से जुड़ा हुआ है।

मिलान (विकल्पों की तुलना)

  • 'रात्रि की नीरवता' — अंश में रात्रि केवल पृष्ठभूमि है, और वह नीरव नहीं बल्कि ढोलक की थाप से भरी हुई है।

  • 'प्रात:काल का समय' — 'प्रातःकाल' अंश में केवल बजने की अवधि का अंतिम छोर बताने के लिए आया है, विषय के रूप में नहीं।

  • 'पहलवान की लाठी' — लाठी का अंश में कोई प्रसंग ही नहीं है।

  • 'पहलवान की ढोलक' — अंश का आरंभिक और सबसे विस्तृत चित्र इसी वस्तु का है, रात भर चलने वाली उसकी थाप और गाँव पर उसका प्रभाव खोलकर वर्णित है, और शेष विवरण उसी को बजाने वाले पात्र का है; दिए गए विकल्पों में यही सबसे व्यापक शीर्षक बनता है।

अतः गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है — 'पहलवान की ढोलक'। (यह अंश फणीश्वरनाथ रेणु की इसी नाम की प्रसिद्ध कहानी का आरंभिक भाग है।)

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