गद्य-शिक्षण में काठिन्य निवारण किया जा सकता है
2016
गद्य-शिक्षण में काठिन्य निवारण किया जा सकता है
Answer: D. उपर्युक्त सभी — संकल्पना: शिक्षण-सहायक सामग्री (श्रव्य-दृश्य साधन) का मूल सिद्धांत यह है कि जब विद्यार्थियों को मात्र मौखिक/लिखित वर्णन से किसी अंश को समझने में कठिनाई होती…
- A.
चित्र दिखाकर
- B.
वस्तु को प्रत्यक्ष दिखाकर
- C.
मॉडल दिखाकर
- D.
उपर्युक्त सभी
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Correct answer: D
संकल्पना: शिक्षण-सहायक सामग्री (श्रव्य-दृश्य साधन) का मूल सिद्धांत यह है कि जब विद्यार्थियों को मात्र मौखिक/लिखित वर्णन से किसी अंश को समझने में कठिनाई होती है, तो शिक्षक मूर्त से अमूर्त की दिशा में बढ़ने वाली दृश्य-सहायक तकनीकों का प्रयोग करता है — जैसे वास्तविक वस्तु, मॉडल अथवा चित्र — जिससे विषय-वस्तु प्रत्यक्ष इंद्रिय-बोध द्वारा अधिक सुगम बन जाती है।
अनुप्रयोग: गद्य-शिक्षण में जब किसी वर्णित वस्तु/दृश्य को समझने में काठिन्य उत्पन्न होता है, शिक्षक निम्नलिखित तीन मान्यता-प्राप्त दृश्य-सहायक विधियों में से किसी का भी प्रयोग कर सकता है, स्थिति व उपलब्धता के अनुसार:
चित्र दिखाकर — वर्णित वस्तु/दृश्य को द्वि-आयामी दृश्य रूप में प्रस्तुत करना, जब वास्तविक वस्तु उपलब्ध न हो।
वस्तु को प्रत्यक्ष दिखाकर — विद्यार्थी को सबसे ठोस व प्रत्यक्ष इंद्रिय-अनुभव देना, जब वस्तु उपलब्ध हो।
मॉडल दिखाकर — जब वास्तविक वस्तु न लाई जा सके (आकार/दुर्लभता/असुविधा के कारण), उसकी संरचना को त्रि-आयामी प्रतिकृति द्वारा समझाना।
क्रॉस-चेक: शिक्षणशास्त्र में इन तीनों को समकक्ष (co-ordinate) दृश्य-सहायक विधियों के रूप में पढ़ाया जाता है — कोई एक विधि शेष दो का स्थान लेने में सदैव श्रेष्ठ नहीं मानी जाती, बल्कि परिस्थिति (वस्तु की उपलब्धता, आकार, सुरक्षा आदि) यह तय करती है कि शिक्षक किस विधि का प्रयोग करे। चूँकि तीनों ही स्वतंत्र रूप से काठिन्य-निवारण में समान रूप से मान्य हैं, इसलिए किसी एक को अकेला चुनना समग्र उत्तर को अधूरा छोड़ देगा।
परिणाम: अतः चित्र, वस्तु और मॉडल — इनमें से प्रत्येक स्वतंत्र रूप से काठिन्य-निवारण की एक वैध विधि है; चूँकि तीनों ही व्यक्तिगत रूप से सही हैं, इसलिए सही उत्तर इन तीनों को सम्मिलित करने वाला विकल्प है — "उपर्युक्त सभी"।
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