'उच्च प्राथमिक स्तर की हिंदी भाषा की पाठ्य-पुस्तकों में हिंदीतर भाषा को भी जगह…
2019
'उच्च प्राथमिक स्तर की हिंदी भाषा की पाठ्य-पुस्तकों में हिंदीतर भाषा को भी जगह मिलनी चाहिए।' – इस कथन का औचित्य नहीं है।
Answer: A. हिंदीतर भाषियों के आक्रोश को शांत करना। — हिंदी पाठ्यपुस्तकों में हिंदीतर भाषाओं की सामग्री को शामिल करने का औचित्य सदैव शिक्षार्थी के अधिगम-उद्देश्यों (सीखने के उद्देश्यों) से जुड़ा होना चाहिए — जैसे…
- A.
हिंदीतर भाषियों के आक्रोश को शांत करना।
- B.
हिंदीतर भाषा के साहित्य से परिचित कराना।
- C.
हिंदीतर भाषाओं की रचना-शैलियों से परिचित कराना।
- D.
हिंदीतर भाषाओं के माध्यम से संवेदनाओं को विस्तार देना।
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Correct answer: A
हिंदी पाठ्यपुस्तकों में हिंदीतर भाषाओं की सामग्री को शामिल करने का औचित्य सदैव शिक्षार्थी के अधिगम-उद्देश्यों (सीखने के उद्देश्यों) से जुड़ा होना चाहिए — जैसे विविध साहित्य से परिचय, भिन्न रचना-शैलियों की समझ, तथा भाषिक-सांस्कृतिक विविधता के माध्यम से संवेदनाओं व समझ का विस्तार। इसके विपरीत, किसी भाषिक समूह के असंतोष या आक्रोश को शांत करने जैसा उद्देश्य पाठ्यचर्या-निर्माण का सामाजिक-प्रशासनिक कारण है, न कि शैक्षणिक कारण — इसलिए वह पाठ्यपुस्तक में भाषा-विविधता शामिल करने का वैध शैक्षणिक औचित्य नहीं बन सकता।
प्रश्न में दिए गए कथन के पक्ष में दिए चार विकल्पों में से जो विकल्प विद्यार्थी के सीखने से नहीं जुड़ा, वही इसका औचित्य नहीं बनता:
हिंदीतर भाषियों के आक्रोश को शांत करना — यह एक सामाजिक/प्रशासनिक उद्देश्य है, विद्यार्थी के अधिगम से सीधे नहीं जुड़ा।
हिंदीतर भाषा के साहित्य से परिचित कराना — यह साहित्यिक जागरूकता बढ़ाने का सीधा अधिगम-उद्देश्य है।
हिंदीतर भाषाओं की रचना-शैलियों से परिचित कराना — यह भाषा की विविध रचना-शैलियों की समझ विकसित करने का अधिगम-उद्देश्य है।
हिंदीतर भाषाओं के माध्यम से संवेदनाओं को विस्तार देना — यह सामाजिक-संवेगात्मक विकास का अधिगम-उद्देश्य है।
स्पष्ट है कि साहित्यिक परिचय, रचना-शैलियों की समझ और संवेदनाओं का विस्तार — ये तीनों सीधे विद्यार्थी के ज्ञान, समझ अथवा संवेगात्मक विकास से जुड़े हैं, जबकि किसी भाषिक समूह के आक्रोश को शांत करना केवल उस समूह की प्रतिक्रिया के प्रबंधन से संबंधित है — यह शैक्षणिक नहीं, सामाजिक-प्रशासनिक उद्देश्य है। यही अंतर इसे एक वैध शैक्षणिक औचित्य के रूप में अयोग्य ठहराता है, और यही प्रश्न का सही उत्तर है।
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