किस विधि में शिक्षार्थी की प्रथम भाषा शिक्षण में केन्द्रीय भूमिका निभाती है?
2023
किस विधि में शिक्षार्थी की प्रथम भाषा शिक्षण में केन्द्रीय भूमिका निभाती है?
Answer: B. व्याकरण-अनुवाद विधि — अवधारणा: भाषा-शिक्षण विधियाँ इस आधार पर भिन्न होती हैं कि वे कक्षा में शिक्षार्थी की प्रथम भाषा (मातृभाषा) के प्रयोग को कितना स्थान देती हैं। कुछ विधियाँ…
- A.
सम्प्रेषणात्मक भाषा शिक्षण विधि
- B.
व्याकरण-अनुवाद विधि
- C.
कार्य-आधारित अधिगम
- D.
प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) विधि
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Correct answer: B
अवधारणा: भाषा-शिक्षण विधियाँ इस आधार पर भिन्न होती हैं कि वे कक्षा में शिक्षार्थी की प्रथम भाषा (मातृभाषा) के प्रयोग को कितना स्थान देती हैं। कुछ विधियाँ (जैसे डायरेक्ट विधि, सम्प्रेषणात्मक भाषा शिक्षण, कार्य-आधारित अधिगम) लक्ष्य भाषा में सीधे विसर्जन पर बल देकर प्रथम भाषा के प्रयोग को न्यूनतम या पूर्णतः वर्जित करती हैं, जबकि व्याकरण-अनुवाद विधि में प्रथम भाषा को शिक्षण का केन्द्रीय माध्यम बनाया जाता है — व्याकरण नियम प्रथम भाषा में समझाए जाते हैं और पाठों का अनुवाद दोनों भाषाओं में किया जाता है।
अनुप्रयोग: दिए गए चार विकल्पों में से केवल व्याकरण-अनुवाद विधि में प्रत्येक चरण पर प्रथम भाषा अनिवार्य रूप से उपयोग होती है — नियमों की व्याख्या प्रथम भाषा में, पाठों का अनुवाद दोनों दिशाओं में, तथा प्रथम भाषा और लक्ष्य भाषा की व्याकरणिक तुलना। इसके विपरीत, डायरेक्ट विधि में लक्ष्य भाषा को केवल लक्ष्य भाषा के माध्यम से (वस्तुओं, क्रियाओं, संकेतों द्वारा) पढ़ाया जाता है और प्रथम भाषा का प्रयोग स्पष्ट रूप से वर्जित होता है। सम्प्रेषणात्मक विधि में सार्थक संप्रेषण लक्ष्य भाषा में केन्द्रित होता है, तथा कार्य-आधारित अधिगम में वास्तविक जीवन के कार्य लक्ष्य भाषा में पूर्ण किए जाते हैं — दोनों में प्रथम भाषा की कोई संरचनात्मक भूमिका नहीं होती।
क्रॉस-चेक: शेष तीन विकल्पों की जाँच करने पर स्पष्ट होता है कि कोई भी प्रथम भाषा को केन्द्रीय भूमिका नहीं देता:
सम्प्रेषणात्मक भाषा शिक्षण विधि वास्तविक संप्रेषण और अर्थ-निर्माण पर बल देती है, जिसमें प्रथम भाषा का प्रयोग नगण्य या प्रासंगिक मात्र होता है;
कार्य-आधारित अधिगम में मूल्यांकन कार्य-पूर्ति पर आधारित होता है, न कि प्रथम भाषा के प्रयोग पर;
प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) विधि की मूल परिभाषा ही लक्ष्य-भाषा-केवल शिक्षण है, जो प्रथम भाषा को कक्षा से बाहर रखती है।
अतः प्रथम भाषा में नियम-व्याख्या और उभयदिशीय अनुवाद पर आधारित व्याकरण-अनुवाद विधि ही वह विधि है जिसमें शिक्षार्थी की प्रथम भाषा शिक्षण में केन्द्रीय भूमिका निभाती है।
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