'बालक की प्रारम्भिक शिक्षा उसकी मातृभाषा में दी जाये' यह मानना है—
2016
'बालक की प्रारम्भिक शिक्षा उसकी मातृभाषा में दी जाये' यह मानना है—
Answer: B. महात्मा गाँधी का — शिक्षाशास्त्र में विभिन्न विचारकों की मान्यताएँ उनके द्वारा प्रतिपादित शिक्षा-पद्धति की मूल विशेषता से जुड़ी होती हैं। यह विशिष्ट मान्यता कि बालक की…
- A.
मॉण्टेसरी का
- B.
महात्मा गाँधी का
- C.
फ्रॉबेल का
- D.
किलपैट्रिक का
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Correct answer: B
शिक्षाशास्त्र में विभिन्न विचारकों की मान्यताएँ उनके द्वारा प्रतिपादित शिक्षा-पद्धति की मूल विशेषता से जुड़ी होती हैं। यह विशिष्ट मान्यता कि बालक की प्रारम्भिक शिक्षा उसकी मातृभाषा में ही दी जानी चाहिए, महात्मा गाँधी की "बुनियादी शिक्षा" (नई तालीम) योजना का मूल सिद्धांत है, जिसे उन्होंने 1937 के वर्धा शिक्षा सम्मेलन में प्रस्तुत किया था — इसके पीछे तर्क यह था कि बालक अपनी मातृभाषा में ही सर्वाधिक स्वाभाविक रूप से सोचता और अभिव्यक्त करता है।
अतः "प्रारम्भिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाये" — यह मान्यता सीधे गाँधी की नई तालीम योजना से जुड़ती है, जिसमें बालक की शिक्षा को उसकी मातृभाषा, हस्तकौशल (क्राफ्ट) और सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश से जोड़ने पर बल दिया गया।
मॉण्टेसरी पद्धति की परिभाषित विशेषता विशेष रूप से डिज़ाइन की गई इन्द्रिय-प्रशिक्षण सामग्री (सेंसरी एपेरेटस) के माध्यम से बालक की स्वतः-शिक्षा (ऑटो-एजुकेशन) है।
फ्रॉबेल की किंडरगार्टन पद्धति की परिभाषित विशेषता खेल-विधि, गीतों और वस्तु-पाठों (गिफ्ट्स एण्ड ऑक्युपेशन्स) के माध्यम से बाल्यावस्था-शिक्षा है।
किलपैट्रिक की प्रोजेक्ट पद्धति की परिभाषित विशेषता सोद्देश्य क्रियाकलाप (परपजफुल एक्टिविटी) के माध्यम से सीखना है।
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