“ढपोर शंख” मुहावरे का क्या अर्थ है?

2026

“ढपोर शंख” मुहावरे का क्या अर्थ है?

Answer: C. केवल बड़ी-बड़ी बातें करनाअवधारणामुहावरा वह रूढ़ वाक्यांश है जिसका अर्थ उसके शब्दों के शाब्दिक जोड़ से नहीं, बल्कि प्रचलित लाक्षणिक प्रयोग से निकलता है। मुहावरे में आया बिंब किसी वस्तु…

  1. A.

    विख्यात होना

  2. B.

    कंगाल होना

  3. C.

    केवल बड़ी-बड़ी बातें करना

  4. D.

    सिफ़ारिश करवाना

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Correct answer: C

अवधारणा

मुहावरा वह रूढ़ वाक्यांश है जिसका अर्थ उसके शब्दों के शाब्दिक जोड़ से नहीं, बल्कि प्रचलित लाक्षणिक प्रयोग से निकलता है।

मुहावरे में आया बिंब किसी वस्तु के गुण-धर्म को मानव-व्यवहार पर आरोपित करता है; अर्थ उसी आरोपित गुण से तय होता है, इसलिए पहले बिंब पहचानिए, फिर उसका गुण व्यवहार पर लागू कीजिए।

अनुप्रयोग

“ढपोर शंख” में “ढपोर” का भाव थोथा या खोखला है, और “शंख” वह वस्तु है जो फूँकने पर केवल ऊँची ध्वनि करती है, जबकि भीतर से रिक्त रहती है।

खोखलेपन के साथ ऊँची ध्वनि—यही गुण मानव-व्यवहार पर आरोपित होकर ऐसे व्यक्ति को दर्शाता है जिसकी वाणी बड़ी-बड़ी होती है, किंतु उसके पीछे कोई कार्य या सार नहीं होता।

विकल्पों का अंतर

  • “विख्यात होना” नाम और यश के प्रसार को व्यक्त करता है, जिसका खोखली ध्वनि के बिंब से कोई संबंध नहीं है।

  • “कंगाल होना” धन के अभाव से उत्पन्न आर्थिक दशा को व्यक्त करता है, जो इस बिंब का विषय नहीं है।

  • “सिफ़ारिश करवाना” दूसरे के प्रभाव से काम बनवाने को व्यक्त करता है, जो इस बिंब में कहीं नहीं आता।

  • शेष भाव—बड़ी वाणी और शून्य कार्य—ही ऊँची ध्वनि करने वाले खोखले शंख के गुण से मेल खाता है।

अतः “ढपोर शंख” मुहावरे का अर्थ है—“केवल बड़ी-बड़ी बातें करना”, अर्थात् ऐसा व्यक्ति जो केवल डींग हाँकता है और करता कुछ नहीं।

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