निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : आकाश का साफ़ा…

2019

निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

आकाश का साफ़ा बाँधकर
सूरज की चिलम खींचता
बैठा है पहाड़
घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी
पास ही दहक रही है
पलाश के जंगल की अंगीठी
अंधकार दूर पूर्व में
सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा
अचानक बोला मोर
जैसे किसी ने आवाज़ दी -
‘अजी सुनते हो।’
चिलम औंधी
धुआँ उठा
सूरज डूबा
अँधेरा छा गया।

शाम का सजीव चित्रण करने के लिए किस रूपक को अनुपयुक्त माना जा सकता है?

Answer: C. मोर की आवाज़रूपक अलंकार में उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप किया जाता है — दो असमान वस्तुओं को बिना किसी संबंधसूचक शब्द ('जैसे', 'मानो' आदि) के एक ही मान लिया जाता है, जिससे…

  1. A.

    सूरज की चिलम

  2. B.

    आकाश का साफ़ा

  3. C.

    मोर की आवाज़

  4. D.

    जंगल की अंगीठी

Attempted by 7 students.

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Correct answer: C

रूपक अलंकार में उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप किया जाता है — दो असमान वस्तुओं को बिना किसी संबंधसूचक शब्द ('जैसे', 'मानो' आदि) के एक ही मान लिया जाता है, जिससे एक वस्तु के सारे गुण-धर्म दूसरी वस्तु पर आरोपित हो जाते हैं। इसके विपरीत, जब किसी वास्तविक घटना या ध्वनि की तुलना 'जैसे/मानो' के सहारे किसी और चीज़ से की जाती है, तो वह उपमा अलंकार है, रूपक नहीं — और कथा में घटी वास्तविक घटना स्वयं दृश्य-चित्रण के लिए रूपक नहीं बनती।

प्रस्तुत काव्यांश में पहाड़ को एक पुरुष के रूप में चित्रित किया गया है — 'आकाश का साफ़ा' आकाश को पहाड़ की पगड़ी के रूप में, 'सूरज की चिलम' डूबते सूरज को उसकी चिलम के रूप में, और 'जंगल की अंगीठी' दहकते पलाश वन को अंगीठी के रूप में प्रस्तुत करता है — ये तीनों रूपक पहाड़ के दृश्य को सजीव बनाते हैं। किंतु 'मोर बोला जैसे किसी ने आवाज़ दी' में मोर का बोलना कथा की एक वास्तविक घटना है, जिसे उपमा ('जैसे') द्वारा मानवीय पुकार से जोड़ा गया है — यह किसी दृश्य वस्तु को किसी और वस्तु के रूप में चित्रित करने वाला रूपक नहीं है।

यदि साफ़ा, चिलम या अंगीठी वाले रूपकों को हटा दिया जाए, तो पहाड़ के मानवीकरण की पूरी दृश्य-योजना बिखर जाएगी; किंतु मोर की आवाज़ वाली पंक्ति हटाने पर भी शेष तीनों रूपक शाम के दृश्य को पूरी तरह सजीव बनाए रखते हैं — इससे पुष्टि होती है कि मोर की आवाज़ इस दृश्य-चित्रण के रूपकों में सम्मिलित नहीं है और अतः अनुपयुक्त रूपक है।

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