निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का…

2024

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

इस संसार में सब कुछ अस्थायी है। पाप और पुण्य दोनों इस संसार से संबंधित हैं, इसलिए पाप और पुण्य भी अस्थायी हैं। पुण्य सुख देकर और पाप दुख देकर अंत को प्राप्त होता है। लेकिन पाप और पुण्य में थोड़ा अंतर यह है कि पुण्य का फल यदि हम नहीं चाहते तो उस फल को अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं। पाप लोहे की जंजीर है तो पुण्य सोने की। बंधन दोनों में है। लोहे की जंजीर से छूटने का आदमी का मन भी करता है लेकिन सोने की जंजीर से जो बंधा हुआ हो उसको वह बंधन प्यारा लगने लगता है। उसमें उसको धन नजर आता है उससे छूटने का मन नहीं करता।

पाप और पुण्य दोनों ________ हैं।

Answer: B. अस्थायीगद्यांश-आधारित रिक्त-स्थान वाले प्रश्नों में सही उत्तर उसी वाक्य या उसके निकटवर्ती वाक्यों में दिए गए स्पष्ट कथन से प्राप्त होता है — रिक्त स्थान वाले वाक्य…

  1. A.

    स्थायी

  2. B.

    अस्थायी

  3. C.

    स्वाभाविक

  4. D.

    हानिकारक

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Correct answer: B

गद्यांश-आधारित रिक्त-स्थान वाले प्रश्नों में सही उत्तर उसी वाक्य या उसके निकटवर्ती वाक्यों में दिए गए स्पष्ट कथन से प्राप्त होता है — रिक्त स्थान वाले वाक्य के भाव से मेल खाने वाला शब्द गद्यांश के प्रसंग से चुना जाता है, न कि शब्द के सामान्य अर्थ मात्र से।

गद्यांश की आरंभिक पंक्तियों में स्पष्ट कहा गया है — 'इस संसार में सब कुछ अस्थायी है। पाप और पुण्य दोनों इस संसार से संबंधित हैं, इसलिए पाप और पुण्य भी अस्थायी हैं।' रिक्त स्थान वाला वाक्य ('पाप और पुण्य दोनों ________ हैं।') इसी कथन को दोहराता है, अतः रिक्त स्थान में वही शब्द आएगा जो गद्यांश में पाप और पुण्य दोनों के लिए प्रयुक्त हुआ है।

  • अस्थायी (सही उत्तर) — गद्यांश में सीधे इसी शब्द से पाप और पुण्य दोनों का वर्णन किया गया है।

  • स्थायी — गद्यांश में संसार की प्रत्येक वस्तु को इसके ठीक विपरीत गुण वाला (अस्थायी) बताया गया है, अतः यह विकल्प गद्यांश के कथन के विरुद्ध है।

  • स्वाभाविक — गद्यांश में पाप-पुण्य की उत्पत्ति या स्वभाव के बारे में कोई ऐसा कथन नहीं है; गद्यांश केवल उनके संसार से संबंध और उनकी अस्थायी प्रकृति पर केंद्रित है।

  • हानिकारक — गद्यांश पुण्य को सुख देने वाला बताता है, इसलिए पुण्य को हानिकारक कहना गद्यांश के कथन के विपरीत है; केवल पाप को दुखदायी बताया गया है, 'हानिकारक' शब्द का प्रयोग गद्यांश में नहीं हुआ है।

अतः रिक्त स्थान का सही उत्तर 'अस्थायी' है।

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