निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही /सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प…
2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही /सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। प्रश्न उठता है कि प्राण का शरीर के साथ बेहतर तालमेल कैसे बैठाकर रखा जाए। ऐसा क्या करें कि प्राण शरीर के हर अंग की तरफ संतुलित और व्यवस्थित होकर बहे। देखा जाए तो बीमारी और कुछ भी नहीं, बल्कि प्राण का उस अंग विशेष में असंतुलित हो जाना ही है। स्वास्थ्य का अर्थ ही होता है – प्राण का समुचित तरीके से समस्त अंगों की तरफ बहना। योग में इस प्राण को बल देने के लिए अनेक अभ्यास हैं। इनके जरिए हम अपने प्राण को रोज बल दे सकते हैं और शरीर में होने वाली बीमारियों की रोकथाम कर सकते हैं। यह प्राण केवल हमारे शरीर की ही संभाल नहीं करता, यह मन, बुद्धि आदि प्रत्येक आयाम को जीवन देता रहता है। रोग का कारण है :
Answer: B. प्राण वायु का अंग विशेष में असंतुलन — अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में सही विकल्प वही होता है जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से कही गई बात को पूरी तरह और सटीक रूप से व्यक्त करता है — न कि…
- A.
प्राण वायु का बहुत अधिक बढ़ जाना
- B.
प्राण वायु का अंग विशेष में असंतुलन
- C.
योग के माध्यम से शारीरिक शक्ति घटाना
- D.
अपने शरीर की उचित देखभाल न करना
Attempted by 6 students.
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Correct answer: B
अवधारणा: अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नों में सही विकल्प वही होता है जो गद्यांश में स्पष्ट रूप से कही गई बात को पूरी तरह और सटीक रूप से व्यक्त करता है — न कि आंशिक, अतिरंजित या गद्यांश से बाहर की कोई व्याख्या।
हल:
प्रश्न में पूछी गई विशिष्ट सूचना पहचानें — यहाँ "रोग का कारण"।
गद्यांश में इस विषय पर दिए गए सीधे कथन को खोजें: "बीमारी और कुछ भी नहीं, बल्कि प्राण का उस अंग विशेष में असंतुलित हो जाना ही है।"
इस कथन के भाव की तुलना प्रत्येक विकल्प से करें।
जो विकल्प इस कथन को बिना जोड़-घटाव के व्यक्त करता है — "प्राण वायु का अंग विशेष में असंतुलन" — वही सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर है।
तुलना/जाँच:
"प्राण वायु का बहुत अधिक बढ़ जाना" — गद्यांश में प्राण की मात्रा बढ़ने की नहीं, बल्कि अंग विशेष में उसके असंतुलन की बात कही गई है, इसलिए यह गद्यांश के कथन से मेल नहीं खाता।
"योग के माध्यम से शारीरिक शक्ति घटाना" — गद्यांश में योग को प्राण को बल देने और रोग की रोकथाम से जोड़ा गया है, शक्ति घटाने से नहीं; यह गद्यांश के भाव के विपरीत है।
"अपने शरीर की उचित देखभाल न करना" — गद्यांश रोग का कारण सीधे प्राण के असंतुलन को बताता है, सामान्य देखभाल की कमी को नहीं; गद्यांश में इसका कोई आधार नहीं है।
अतः सही उत्तर है — "प्राण वायु का अंग विशेष में असंतुलन"।
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