निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त वाले…

2024

निर्देश : नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त वाले विकल्प को चुनिए :

ज़िंदगी की सबसे बड़ी सिफ़त हिम्मत है। व्यक्ति के और सारे गुण उसके हिम्मती होने से ही पैदा होते हैं। कुछ लोग ऐसी गोधूलि में बसते हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। साहस की ज़िंदगी सबसे बड़ी ज़िंदगी होती है। ऐसी ज़िंदगी की पहचान यह है कि वह बिलकुल निडर, बिलकुल बेखौफ़ होती है। साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह इस बात की चिंता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं। अड़ोस-पड़ोस को देखकर चलना, यह साधारण जीव का काम है। ज़िंदगी के उस पन्ने को उलटकर पढ़ना चाहिए जिसके सभी अक्षर फूलों से नहीं, कुछ अंगारों से भी लिखे गए हों।

'गोधूलि' से तात्पर्य है :

Answer: D. संध्या वेलाहिंदी में 'गोधूलि' शब्द 'गो' (गाय) और 'धूलि' (धूल) से मिलकर बना है। परंपरागत ग्रामीण जीवन में जब गाय-बछड़ों के झुंड शाम को चरागाह से घर लौटते हैं, तब उनके…

  1. A.

    रात्रि वेला

  2. B.

    प्रभात वेला

  3. C.

    मध्य रात्रि

  4. D.

    संध्या वेला

Attempted by 13 students.

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Correct answer: D

हिंदी में 'गोधूलि' शब्द 'गो' (गाय) और 'धूलि' (धूल) से मिलकर बना है। परंपरागत ग्रामीण जीवन में जब गाय-बछड़ों के झुंड शाम को चरागाह से घर लौटते हैं, तब उनके खुरों से उड़ी धूल के कारण आकाश धुंधला दिखाई देता है — यह दिन और रात के संधि-काल, अर्थात सूर्यास्त की बेला होता है। इसी कारण 'गोधूलि' शब्द का शाब्दिक एवं शब्दकोशीय अर्थ 'संध्या वेला' (सूर्यास्त के आसपास का समय) है।

गद्यांश में लेखक 'गोधूलि' शब्द का प्रयोग रूपक के रूप में उन लोगों के लिए करता है जो न तो जीत के हर्ष का अनुभव करते हैं और न ही हार की पीड़ा का — अर्थात जो दिन (जीत) और रात (हार) के बीच के धुंधले, अनिश्चित काल में जीते हैं। यह रूपक तभी सार्थक होता है जब 'गोधूलि' को उसके शब्दकोशीय अर्थ 'संध्या वेला' के रूप में समझा जाए, क्योंकि संध्या ही दिन और रात के बीच की वह संधि-बेला है।

  • रात्रि वेला — यह पूर्ण अंधकार का समय है, जबकि गोधूलि में उजाला पूर्णत: समाप्त नहीं होता।

  • प्रभात वेला — यह रात से दिन की ओर की संधि है, जबकि गाय-बछड़ों का लौटना शाम को होता है, सुबह को चरने जाना नहीं।

  • मध्य रात्रि — यह रात का मध्य-बिंदु है, कोई संधि-काल नहीं; गोधूलि से इसका कोई शाब्दिक संबंध नहीं।

  • संध्या वेला — गायों के लौटने से उठी धूल के कारण दिखने वाला धुंधलका ही 'गोधूलि' कहलाता है, अतः यही सही अर्थ है।

अतः 'गोधूलि' से तात्पर्य संध्या वेला से है।

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