न्याय के अनुसार, वह ज्ञान जो किसी अन्य ज्ञान के कारण उत्पन्न नहीं होता, क्या…
2024
न्याय के अनुसार, वह ज्ञान जो किसी अन्य ज्ञान के कारण उत्पन्न नहीं होता, क्या कहलाता है?
Answer: A. प्रत्यक्ष — अवधारणान्याय दर्शन ज्ञान के साधनों, अर्थात् प्रमाणों, के माध्यम से प्रमा को स्वीकार करता है। प्रत्यक्ष वह तात्कालिक ज्ञान है जो इन्द्रिय और उसके विषय के…
- A.
प्रत्यक्ष
- B.
अनुमान
- C.
शब्द
- D.
अनुपलब्धि
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Correct answer: A
अवधारणा
न्याय दर्शन ज्ञान के साधनों, अर्थात् प्रमाणों, के माध्यम से प्रमा को स्वीकार करता है। प्रत्यक्ष वह तात्कालिक ज्ञान है जो इन्द्रिय और उसके विषय के सन्निकर्ष से उत्पन्न होता है; यह किसी पूर्ववर्ती अनुमान अथवा शाब्दिक ज्ञान पर निर्भर नहीं होता।
अनुप्रयोग
प्रश्नांश में ऐसे ज्ञान के विषय में पूछा गया है जो किसी अन्य ज्ञान के माध्यम से उत्पन्न नहीं होता। प्रत्यक्ष इस परिभाषा के अनुरूप है, क्योंकि इसका तात्कालिक कारण इन्द्रिय-विषय सन्निकर्ष है।
भेद
अनुमान वह परोक्ष ज्ञान है जो हेतु तथा साध्य के साथ उसके अविनाभाव-सम्बन्ध को पहचानने के पश्चात् उत्पन्न होता है।
शब्दप्रमाण वह शाब्दिक ज्ञान है जो किसी विश्वसनीय वक्ता के सार्थक कथन को समझने से उत्पन्न होता है।
अनुपलब्धि उस वस्तु के ज्ञानाभाव पर आधारित अभाव-ज्ञान है जो अन्यथा उपस्थित होती; यह प्रत्यक्ष की न्याय-दर्शनसम्मत परिभाषा नहीं है।
पुनःपरीक्षण
न्याय दर्शन में प्रत्यक्ष की परिभाषा इन्द्रिय-विषय सन्निकर्ष से उत्पन्न ज्ञान के रूप में आरम्भ होती है, जबकि अनुमान को प्रत्यक्षपूर्वक उत्पन्न ज्ञान कहा गया है। यह भेद प्रत्यक्ष को निर्धारित करता है।
अतः अपेक्षित ज्ञान प्रत्यक्ष है।