न्याय दर्शन के अनुसार, जब हम किसी घट का प्रत्यक्ष बोध करते हैं, तब उसके…

2024

न्याय दर्शन के अनुसार, जब हम किसी घट का प्रत्यक्ष बोध करते हैं, तब उसके परिभाषक धर्म के रूप में सार्वभौम ‘घटत्व’ का ग्रहण निम्नलिखित में से किसके माध्यम से होता है?

Answer: D. सामान्यलक्षणअवधारणान्याय दर्शन सामान्य इन्द्रिय–अर्थ सन्निकर्ष से होने वाले लौकिक प्रत्यक्ष तथा ऐसे अलौकिक प्रत्यक्ष को स्वीकार करता है, जिसमें ज्ञान तात्कालिक रूप से…

  1. A.

    योगज

  2. B.

    अनुमान

  3. C.

    ज्ञानलक्षण

  4. D.

    सामान्यलक्षण

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Correct answer: D

अवधारणा

न्याय दर्शन सामान्य इन्द्रिय–अर्थ सन्निकर्ष से होने वाले लौकिक प्रत्यक्ष तथा ऐसे अलौकिक प्रत्यक्ष को स्वीकार करता है, जिसमें ज्ञान तात्कालिक रूप से इन्द्रियग्राह्य विशेष से अधिक को प्रस्तुत करता है। इसके अलौकिक प्रकारों में ज्ञानलक्षण, सामान्यलक्षण और योगज सम्मिलित हैं तथा प्रत्येक का आधार भिन्न है।

अनुप्रयोग

यहाँ इन्द्रियाँ पहले किसी विशेष घट के सम्पर्क में आती हैं। तत्पश्चात् ज्ञान उस व्यक्ति-विशेष के माध्यम से सार्वभौम ‘घटत्व’ को प्रस्तुत करता है। यही सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष का परिभाषक व्यापार है।

भेद

  • योगज ज्ञान योगाभ्यास से उत्पन्न होता है और सामान्य इन्द्रियों की पहुँच से परे विषयों से सम्बन्धित होता है।

  • अनुमान हेतु और व्याप्ति से उत्पन्न परोक्ष ज्ञान है; यह अलौकिक प्रत्यक्ष का प्रकार नहीं है।

  • ज्ञानलक्षण पूर्वज्ञान से सम्बद्ध किसी गुण को प्रस्तुत करता है, जैसे चन्दन को देखकर उसकी सुगन्ध का अनुभव होना।

निष्कर्ष

अतः सार्वभौम ‘घटत्व’ का ग्रहण सामान्यलक्षण के माध्यम से होता है।

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