सत्प्रतिपक्ष हेत्वाभास को निम्न नाम से भी जाना जाता है :
2024
सत्प्रतिपक्ष हेत्वाभास को निम्न नाम से भी जाना जाता है :
Answer: B. प्रकरणसम — अवधारणान्याय-अनुमान में हेत्वाभास ऐसा आभासी हेतु है जो साध्य को सिद्ध करने में विफल रहता है। इसके प्रकारों से यह भेद स्पष्ट होता है कि हेतु असिद्ध है, विरुद्ध…
- A.
असिद्ध
- B.
प्रकरणसम
- C.
विरुद्ध
- D.
असाधारण
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Correct answer: B
अवधारणा
न्याय-अनुमान में हेत्वाभास ऐसा आभासी हेतु है जो साध्य को सिद्ध करने में विफल रहता है। इसके प्रकारों से यह भेद स्पष्ट होता है कि हेतु असिद्ध है, विरुद्ध है, समान बल वाले विरोधी हेतु से प्रतिपक्षयुक्त है अथवा उसके व्याप्ति-वितरण में दोष है।
अनुप्रयोग
सत्प्रतिपक्ष तब उत्पन्न होता है, जब प्रस्तुत हेतु के सम्मुख समान बल वाला दूसरा हेतु उपस्थित हो, जो विपरीत निष्कर्ष का समर्थन करता हो। दोनों हेतु एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं, अतः विषय अनिर्णीत रहता है।
भेद
असिद्ध: प्रस्तावित हेतु स्वयं पक्ष में सिद्ध नहीं होता।
प्रकरणसम: समान बल वाला प्रतिहेतु विपरीत निष्कर्ष का समर्थन करता है और विषय को संतुलित अवस्था में छोड़ देता है।
विरुद्ध: हेतु उस निष्कर्ष के विपरीत को सिद्ध करता है, जिसे सिद्ध करने के लिए उसे प्रस्तुत किया गया था।
असाधारण: हेतु केवल पक्ष तक सीमित रहता है तथा अविनाभाव-सम्बन्ध स्थापित करने हेतु तुलनीय सपक्ष या विपक्ष दृष्टान्तों में उपलब्ध नहीं होता।
पुनःपरीक्षण
यहाँ परिभाषक लक्षण समान बल वाले प्रतिहेतु की उपस्थिति है, न कि हेतु का असिद्ध, विरुद्ध अथवा केवल पक्ष तक सीमित होना। अतः सत्प्रतिपक्ष को प्रकरणसम भी कहा जाता है।