निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प…

2019

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए :

आज शिक्षक की भूमिका उपदेशक या ज्ञानदाता की-सी नहीं रही। वह तो मात्र एक प्रेरक है कि शिक्षार्थी स्वयं सीख सकें। उनके किशोर मानस को ध्यान में रखकर शिक्षक को अपने शिक्षण कार्य के दौरान अध्ययन-अध्यापन की परंपरागत विधियों से दो कदम आगे जाना पड़ेगा, ताकि शिक्षार्थी समकालीन यथार्थ और दिन-प्रतिदिन बदलते जीवन की चुनौतियों के बीच मानव-मूल्यों के प्रति अडिग आस्था बनाए रखने की प्रेरणा ग्रहण कर सके। पाठगत बाधाओं को दूर करते हुए विद्यार्थियों की सहभागिता को सही दिशा प्रदान करने का कार्य शिक्षक ही कर सकता है।

भाषा शिक्षण की कोई एक विधि नहीं हो सकती। जैसे मध्यकालीन कविता में अलंकार, छंदविधान, तुक आदि के प्रति आग्रह था किंतु आज लय और प्रवाह का महत्त्व है। कविता पढ़ाते समय कवि की युग चेतना के प्रति सजगता समझना आवश्यक है। निबंध में लेखक के दृष्टिकोण और भाषा-शैली का महत्त्व है और शिक्षार्थी को अर्थग्रहण की योग्यता का विकास जरूरी है। कहानी के भीतर बुनी अनेक कहानियों को पहचानने और उन सूत्रों को पल्लवित करने का अभ्यास शिक्षार्थी की कल्पना और अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाने के लिए उपयोगी हो सकता है। कभी-कभी कहानी का नाटक में विधा परिवर्तन कर उसका मंचन किया जा सकता है।

मूल्यांकन वस्तुतः सीखने की ही एक प्रणाली है, ऐसी प्रणाली जो रटंत प्रणाली से मुक्ति दिला सके। परंपरागत साँचे का अनुपालन न करे, अपना ढाँचा निर्मित कर सके। इसलिए यह गाँठ बाँध लेना आवश्यक है कि भाषा और साहित्य के प्रश्न बँधे-बँधाए उत्तरों तक सीमित नहीं हो सकते। शिक्षक पूर्वनिर्धारित उत्तर की अपेक्षा नहीं कर सकता। विद्यार्थियों के उत्तर साँचे से हटकर किंतु तर्क संगत हो सकते हैं और सही भी। इस खुलेपन की चुनौती को स्वीकारना आवश्यक है।

कहानी के द्वारा लेखन विद्यार्थियों में कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति की कुशलता बढ़ाने के लिए महत्त्वपूर्ण गतिविधि हो सकती है :

Answer: C. निहित कथासूत्रों का पल्लवनयह अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्न है। ऐसे प्रश्नों में दिए गए कथन का समर्थन गद्यांश में वर्णित उसी विशिष्ट तथ्य या गतिविधि से करना होता है जिससे कथन में बताया…

  1. A.

    कहानी का वाचन

  2. B.

    कहानी का विधा-परिवर्तन

  3. C.

    निहित कथासूत्रों का पल्लवन

  4. D.

    कहानी को मौखिक सुनाने का अभ्यास

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Correct answer: C

यह अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्न है। ऐसे प्रश्नों में दिए गए कथन का समर्थन गद्यांश में वर्णित उसी विशिष्ट तथ्य या गतिविधि से करना होता है जिससे कथन में बताया गया परिणाम सीधे जुड़ा हो — यहाँ परिणाम है 'शिक्षार्थियों में कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति की कुशलता बढ़ाना'।

गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद में भाषा-शिक्षण की विविध विधाओं की चर्चा करते हुए कहानी के संदर्भ में कहा गया है — 'कहानी के भीतर बुनी अनेक कहानियों को पहचानने और उन सूत्रों को पल्लवित करने का अभ्यास शिक्षार्थी की कल्पना और अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाने के लिए उपयोगी हो सकता है।' यह वाक्य कथन में दिए गए परिणाम को ठीक उसी गतिविधि से जोड़ता है जिसे कहानी में निहित (छिपे) सूत्रों का पल्लवन (विस्तार) कहा जाता है।

गद्यांश में उल्लिखित अन्य गतिविधियों से तुलना:

  • कहानी का वाचन — गद्यांश के इस भाग में 'वाचन' शब्द का कोई उल्लेख नहीं है, इसलिए इसे उपर्युक्त परिणाम से नहीं जोड़ा जा सकता।

  • कहानी का विधा-परिवर्तन — गद्यांश में इसका उल्लेख कहानी को नाटक में बदलकर मंचन करने के प्रसंग में हुआ है ('कभी-कभी कहानी का नाटक में विधा परिवर्तन कर उसका मंचन किया जा सकता है'), किंतु इसे कल्पना/अभिव्यक्ति कौशल बढ़ाने से नहीं जोड़ा गया है।

  • कहानी को मौखिक सुनाने का अभ्यास — गद्यांश के इस भाग में इसका कोई उल्लेख नहीं है।

अतः गद्यांश के शब्दों से प्रत्यक्ष मेल के आधार पर सही विकल्प 'निहित कथासूत्रों का पल्लवन' है।

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