निर्देश : निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त…
2023
निर्देश : निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
आया समय, उठो तुम नारी,
युग-निर्माण तुम्हें करना है ।
आज़ादी की खुदी नींव में,
तुम्हें प्रगति पत्थर भरना है ।
अपने को कमज़ोर न समझो,
जननी हो संपूर्ण जगत की, गौरव हो ।
स्त्री के लिए किस ‘विशेषण’ का प्रयोग नहीं किया गया है ?
Answer: C. अबला — अवधारणा: ‘अपठित काव्यांश’ पर आधारित ऐसे प्रश्नों में यह जाँचना होता है कि दिया गया शब्द (यहाँ ‘विशेषण’) पाठ में किसी विशेष पात्र (यहाँ ‘स्त्री’) के लिए वास्तव…
- A.
सबला
- B.
नींव
- C.
अबला
- D.
गौरव
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Correct answer: C
अवधारणा: ‘अपठित काव्यांश’ पर आधारित ऐसे प्रश्नों में यह जाँचना होता है कि दिया गया शब्द (यहाँ ‘विशेषण’) पाठ में किसी विशेष पात्र (यहाँ ‘स्त्री’) के लिए वास्तव में प्रयुक्त हुआ है या नहीं — इसके लिए (i) शब्द का शाब्दिक प्रयोग देखें, (ii) वह शब्द किस संज्ञा/पात्र का वर्णन कर रहा है यह देखें, और (iii) यदि शब्द स्वयं नहीं है तो उसका पर्याय/विलोम भाव प्रसंग में मौजूद है या नहीं, यह देखें।
प्रयोग: पंक्ति “जननी हो संपूर्ण जगत की, गौरव हो ।” में ‘गौरव’ शब्द सीधे स्त्री के लिए प्रयुक्त हुआ है। पंक्ति “आज़ादी की खुदी नींव में” में ‘नींव’ शब्द अवश्य आता है, परन्तु यह ‘आज़ादी’ की नींव का वर्णन करता है — स्त्री को तो इस नींव में ‘प्रगति पत्थर’ भरने को कहा गया है, स्वयं नींव नहीं कहा गया। पंक्ति “अपने को कमज़ोर न समझो” में स्त्री को स्पष्ट रूप से स्वयं को ‘कमज़ोर’ (अर्थात ‘अबला’) न मानने का निर्देश दिया गया है — अर्थात कविता ‘अबला’ के भाव को स्त्री के लिए अस्वीकार करती है, प्रयुक्त नहीं करती।
सबला: यह शब्द अक्षरशः काव्यांश में कहीं नहीं आता।
नींव: शब्द पाठ में है, परन्तु यह ‘आज़ादी’ का वर्णन करता है, ‘स्त्री’ का नहीं।
गौरव: पंक्ति “...गौरव हो ।” में सीधे स्त्री के लिए प्रयुक्त — अर्थात यह काव्यांश में स्त्री हेतु प्रयोग किया गया शब्द है।
अबला: न तो यह शब्द अक्षरशः आता है, न ही भावार्थ में स्त्री हेतु स्वीकार किया गया है — बल्कि पंक्ति “अपने को कमज़ोर न समझो” में इसे सीधे अस्वीकार किया गया है।
निर्णायक बिंदु: काव्यांश का समग्र संदेश — “उठो”, “युग-निर्माण तुम्हें करना है”, “अपने को कमज़ोर न समझो”, “गौरव हो” — स्त्री को दृढ़ एवं सशक्त रूप में चित्रित करता है; अतः भले ही ‘सबला’ शब्द अक्षरशः प्रयुक्त न हो, इसका भाव कविता द्वारा स्त्री के लिए सकारात्मक रूप से स्वीकृत माना जाता है। इसके ठीक विपरीत, कविता ‘कमज़ोर’ (अर्थात ‘अबला’) के भाव को स्त्री के लिए प्रत्यक्ष रूप से एवं स्पष्ट शब्दों में अस्वीकार करती है (“अपने को कमज़ोर न समझो”) — यह गुण न तो अक्षरशः और न ही भावार्थ में स्त्री के लिए स्वीकृत हुआ, बल्कि सीधे नकारा गया। इस प्रकार चारों विकल्पों में से केवल ‘अबला’ ही ऐसा विशेषण है जिसे काव्यांश स्त्री के लिए कहीं भी — न शब्दतः, न भावतः — स्वीकार नहीं करता।
अतः सही उत्तर है — अबला — वह विशेषण जो काव्यांश में स्त्री के लिए प्रयुक्त नहीं किया गया।