निम्नलिखित में से कौन से विपरीत तर्क-वाक्य हैं? A. सभी कवि स्वप्नदृष्टा होते…
2024
निम्नलिखित में से कौन से विपरीत तर्क-वाक्य हैं?
A. सभी कवि स्वप्नदृष्टा होते हैं
B. कुछ कवि स्वप्नदृष्टा होते हैं
C. कुछ कवि स्वप्नदृष्टा नहीं होते हैं
D. कोई वर्ग वृत्त नहीं है
E. कोई कवि स्वप्नदृष्टा नहीं है
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
Answer: D. केवल A और E — संकल्पना — पारम्परिक (अरस्तूवादी) तर्कशास्त्र में प्रत्येक निरपेक्ष तर्कवाक्य दो बातों से निर्धारित होता है: उसका परिमाण (सर्वनिष्ठ या विशेष) और उसका गुण…
- A.
केवल D और E
- B.
केवल C और D
- C.
केवल B और D
- D.
केवल A और E
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Correct answer: D
संकल्पना — पारम्परिक (अरस्तूवादी) तर्कशास्त्र में प्रत्येक निरपेक्ष तर्कवाक्य दो बातों से निर्धारित होता है: उसका परिमाण (सर्वनिष्ठ या विशेष) और उसका गुण (स्वीकारात्मक या निषेधात्मक)। इससे ठीक चार मानक रूप बनते हैं — A: सभी S, P हैं (सर्वनिष्ठ स्वीकारात्मक); E: कोई S, P नहीं है (सर्वनिष्ठ निषेधात्मक); I: कुछ S, P हैं (विशेष स्वीकारात्मक); O: कुछ S, P नहीं हैं (विशेष निषेधात्मक)।
दो तर्कवाक्यों के बीच विपरीत (contrary) सम्बन्ध तब होता है जब तीनों शर्तें एक साथ पूरी हों: दोनों सर्वनिष्ठ हों, दोनों का गुण परस्पर विरोधी हो, तथा दोनों एक ही उद्देश्य पद S और एक ही विधेय पद P के विषय में कहे गए हों। यही विरोध-चतुष्कोण (square of opposition) का A–E युग्म है। विपरीत तर्कवाक्य कभी एक साथ सत्य नहीं हो सकते, किन्तु एक साथ असत्य हो सकते हैं। यह भी ध्यान रखें कि विरोध का कोई भी सम्बन्ध उन्हीं तर्कवाक्यों के बीच परिभाषित होता है जो समान दो पदों से बने हों; भिन्न पद-युग्मों वाले दो तर्कवाक्यों के बीच विरोध का कोई सम्बन्ध नहीं होता।
प्रयोग — दिए गए पाँचों कथनों का वर्गीकरण
कथन | मानक रूप | प्रकार | उद्देश्य – विधेय |
|---|---|---|---|
A. सभी कवि स्वप्नदृष्टा होते हैं | सभी S, P हैं | A: सर्वनिष्ठ स्वीकारात्मक | कवि – स्वप्नदृष्टा |
B. कुछ कवि स्वप्नदृष्टा होते हैं | कुछ S, P हैं | I: विशेष स्वीकारात्मक | कवि – स्वप्नदृष्टा |
C. कुछ कवि स्वप्नदृष्टा नहीं होते हैं | कुछ S, P नहीं हैं | O: विशेष निषेधात्मक | कवि – स्वप्नदृष्टा |
D. कोई वर्ग वृत्त नहीं है | कोई S, P नहीं है | E: सर्वनिष्ठ निषेधात्मक | वर्ग – वृत्त |
E. कोई कवि स्वप्नदृष्टा नहीं है | कोई S, P नहीं है | E: सर्वनिष्ठ निषेधात्मक | कवि – स्वप्नदृष्टा |
परिमाण की जाँच। विपरीत युग्म के लिए दोनों तर्कवाक्यों का सर्वनिष्ठ होना आवश्यक है। B और C विशेष हैं, अतः इनमें से कोई भी विपरीत युग्म का अंग नहीं बन सकता; इस चरण के बाद A, D और E शेष रहते हैं।
पदों की जाँच। इसे शेष सर्वनिष्ठ कथनों पर लगाइए। A और E दोनों कवि तथा स्वप्नदृष्टा के विषय में कहे गए हैं, जबकि D वर्ग तथा वृत्त के विषय में है। इस प्रकार D का A या E के साथ कोई भी पद साझा नहीं है, अतः उनके साथ इसका कोई विरोध-युग्म नहीं बन सकता।
गुण की जाँच। इसे A और E पर लगाइए। A सम्पूर्ण उद्देश्य वर्ग के विषय में विधेय की स्वीकृति करता है — “सभी कवि स्वप्नदृष्टा होते हैं” — जबकि E सम्पूर्ण उद्देश्य वर्ग से उसी विधेय का निषेध करता है — “कोई कवि स्वप्नदृष्टा नहीं है”। दोनों का गुण परस्पर विरोधी है।
तीनों शर्तें — दोनों सर्वनिष्ठ, गुण परस्पर विरोधी, तथा समान दो पदों से निर्मित — A और E के लिए एक साथ पूरी होती हैं। अतः विपरीत तर्क-वाक्य A तथा E हैं।
प्रति-परीक्षण एवं तुलना
विपरीत सम्बन्ध की सत्यता-जाँच: “सभी कवि स्वप्नदृष्टा होते हैं” और “कोई कवि स्वप्नदृष्टा नहीं है” कभी एक साथ सत्य नहीं हो सकते। और यदि कुछ कवि स्वप्नदृष्टा हों तथा कुछ न हों, तो दोनों कथन एक साथ असत्य हो जाते हैं — यही विपरीत सम्बन्ध की पहचान है: एक साथ सत्य कभी नहीं, एक साथ असत्य सम्भव।
तुलना हेतु चतुष्कोण के शेष सम्बन्ध: A के साथ O तथा E के साथ I व्याघाती (contradictory) हैं, जिनमें ठीक एक ही सत्य होता है; I के साथ O — अर्थात् B के साथ C — उप-विपरीत (subcontrary) हैं, जो एक साथ असत्य नहीं हो सकते; A के साथ I तथा E के साथ O उपाश्रित (subaltern) सम्बन्ध में हैं, जहाँ सर्वनिष्ठ के सत्य होने से विशेष का सत्य होना अनिवार्य हो जाता है।
D, “कोई वर्ग वृत्त नहीं है”, स्वयं एक सुगठित सर्वनिष्ठ निषेधात्मक तर्कवाक्य है और वस्तुतः सत्य भी है, किन्तु वह वर्ग तथा वृत्त पदों से बना है। इसका अपना विपरीत तर्कवाक्य “सभी वर्ग वृत्त होते हैं” होता, जो इन पाँच कथनों में दिया ही नहीं गया; अतः D का इनमें से किसी के साथ युग्म नहीं बनता।
परिणाम: विपरीत तर्क-वाक्य A, “सभी कवि स्वप्नदृष्टा होते हैं”, तथा E, “कोई कवि स्वप्नदृष्टा नहीं है”, हैं।