निम्नलिखित में से क्या अर्थगत स्मृति को परिभाषित करता है?
2024
निम्नलिखित में से क्या अर्थगत स्मृति को परिभाषित करता है?
Answer: B. यह विश्व के विषय में छात्र का सामान्य ज्ञान है। — अवधारणा — दीर्घकालिक स्मृति कोई एकल भंडार नहीं है। टुल्विंग के वर्गीकरण में घोषणात्मक स्मृति—अर्थात् वह स्मृति जिसे शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है—धारित…
- A.
यह व्यक्ति के अपने ही अतीत के साथ उसके अद्वितीय संबंध पर निर्भर है।
- B.
यह विश्व के विषय में छात्र का सामान्य ज्ञान है।
- C.
यह जीवन में घटने वाली घटनाओं के कहाँ और कब की जानकारी का प्रतिधारण है।
- D.
यह कौशल तथा संज्ञानात्मक क्रिया के रूप में ज्ञान है।
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Correct answer: B
अवधारणा — दीर्घकालिक स्मृति कोई एकल भंडार नहीं है। टुल्विंग के वर्गीकरण में घोषणात्मक स्मृति—अर्थात् वह स्मृति जिसे शब्दों में व्यक्त किया जा सकता है—धारित विषयवस्तु और उसके पुनर्प्राप्त किए जाने के ढंग के आधार पर दो प्रणालियों में विभाजित होती है। अर्थगत स्मृति में विश्व से संबंधित सामान्य तथ्य, अवधारणाएँ और अर्थ धारित होते हैं तथा इन्हें उस अवसर के संदर्भ के बिना, जिस पर इन्हें सीखा गया था, स्वतंत्र रूप से पुनर्प्राप्त किया जाता है। प्रासंगिक/घटनात्मक स्मृति में समय और स्थान से संबद्ध व्यक्तिगत रूप से अनुभूत घटनाएँ धारित होती हैं तथा व्यक्ति द्वारा मानसिक रूप से अपने अतीत में पुनः जाकर इन्हें पुनर्प्राप्त किया जाता है। अघोषणात्मक अथवा प्रक्रियात्मक स्मृति में कौशल और संज्ञानात्मक क्रियाएँ धारित होती हैं, जिन्हें कथन द्वारा व्यक्त करने के बजाय निष्पादित करके प्रदर्शित किया जाता है।
अनुप्रयोग — प्रश्न का मूल कथन परिभाषा पूछता है, इसलिए विवरण में अर्थगत स्मृति की परिभाषित करने वाली विषयवस्तु का उल्लेख होना चाहिए: विश्व का सामान्य ज्ञान, जो विद्यार्थी के अपने जीवन की किसी घटना के अभिलेख के बजाय तथ्यों और अर्थों के रूप में संचित होता है। "यह विश्व के विषय में छात्र का सामान्य ज्ञान है।" ठीक इसी विषयवस्तु को व्यक्त करता है, और इस प्रकार की विषयवस्तु स्वभावतः इस संदर्भ के बिना पुनर्प्राप्त की जाती है कि उसे कब या कहाँ अर्जित किया गया था।
पुनःजाँच — शेष प्रत्येक विवरण किसी अन्य स्मृति-प्रणाली के परिभाषक लक्षण को बताता है; इसीलिए उनमें से कोई भी अर्थगत स्मृति को परिभाषित नहीं कर सकता:
"यह जीवन में घटने वाली घटनाओं के कहाँ और कब की जानकारी का प्रतिधारण है।"—किसी घटना को उसके समय और स्थान से संबद्ध करना प्रासंगिक/घटनात्मक स्मृति का विशिष्ट लक्षण है।
"यह व्यक्ति के अपने ही अतीत के साथ उसके अद्वितीय संबंध पर निर्भर है।" — अपने ही अतीत का आत्म-संदर्भित पुनःअनुभव (स्वज्ञानात्मक चेतना) भी प्रासंगिक/घटनात्मक स्मृति का विशिष्ट लक्षण है।
"यह कौशल तथा संज्ञानात्मक क्रिया के रूप में ज्ञान है।"—निष्पादन के माध्यम से व्यक्त होने वाला ज्ञान प्रक्रियात्मक एवं अघोषणात्मक स्मृति है।
अतः विश्व के विषय में सामान्य ज्ञान वाला विवरण अर्थगत स्मृति को परिभाषित करता है।